Albert Einstein Biography in Hindi
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विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन के जीवन की कहानी – Albert Einstein Biography in Hindi

दोस्तों आज हम एक ऐसे वैज्ञानिक (Albert Einstein Biography in Hindi) के बारे में बताने जा रहें है जो आज हमारे बीच इस समय नहीं है। पर इन्होने ऐस-ऐसे उपकरण प्रदान किये है। जो हमारे इस समय बहुत से काम आ रहें है। इन्होने (Albert Einstein Biography in Hindi) हमे अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण जैसे सिद्धांन्त समर्पित किये। इससे ज्यादा हमारे लिए गर्व की बात और क्या हो सकती है। एक समय ऐसा था की लोग इन्हे मंद बुद्धि बुलाया करते थे, पर आज इनकी सफलता के कारण इन्हे बुद्धिमान और महान व्यक्ति के नाम से जाना जाने लगा है। पर इन्होने इस मुकाम में पहुंचने के लिए बहुत मेहनत किया है। और ये हमेशा कुछ न कुछ सोचते रहते थे, और इसी कारण इनके मन में हजारो प्रश्न उठा करते थे, और तो और इनके अंदर हमेशा कुछ नया करने और उनके बारे में जानने की जिज्ञासा रहती थी,और सायद इनकी (Albert Einstein Biography in Hindi) सफलता का सबसे बड़ा कारण यही था।

  • अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) मानव इतिहास के सबसे बड़े बुद्धिमान व्यक्ति थे। जो 20 वी सदी के प्रारंभिक 20 वर्षों तक विश्व के विज्ञान जगत पर सक्षम रहें। इन्होंने अपनी खोजो से अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को समर्पित किया।
  • अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) इतने बुद्धिमान, मेहनती और लोकप्रिय इंसान थे कि जब वो बाहर टहलने के लिए निकालते थे तो सभी व्यक्ति उनके द्वारा दिए गए सिद्धांत के बारे में पूछते थे और लोगों के निरंतर पूछताछ करने के कारण, वो उनसे बचने के लिए उन्होंने एक उपाय खोजा।
  • जब लोग उनसे कोई भी प्रश्न पूछते तो वो कहते थे कि माफ कीजिए, और उन्होंने लोगो से कहा कि पता नहीं लोग मुझे आइंस्टाइन क्यों समझ लेते है। लेकिन वह एक बात हमेशा बोलते थे कि मेरे अंदर कोई ऐसा भी गुण नहीं है। परंतु एक बात तो है, की मेरे अंदर किसी चीज को जानने समझने की जिज्ञासा बहुत रहती है।
  • आपको यह बात शायद पता होगी की यह बचपन में बहुत ही कमजोर थे और इसी वजह से इन्हें मंदबुद्धि कहा जाने लगा।

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अल्बर्ट आइंस्टाइन की जीवनी –

  1. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) का जन्म 14 मार्च सन् 1879 में जर्मनी के एक यहूदी परिवार म हुआ था।
  2. इनके पिता का नाम Harmann Einstein और माता का नाम Pauline Einstein था।
  3. जब उनका जन्म हुआ था तब वो दूसरे बच्चो से काफी अलग दिखते थे। क्योंकि उनका सिर कई बच्चो की तुलना में काफी बड़ा था।
  4. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) जैसे -जैसे बड़े हो रहे थे, वैसे वैसे उन्हें बोलने में कुछ कठिनाइयां आने लगी थी। और शायद इसी कारण से वह 4 वर्ष तक कुछ बोल न पाए थे।
  5. एक बार अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) जब अपने माता पिता के साथ खाना खा रहे थे तो उन्होंने अचानक बोला कि सूप बहुत गरम है। और उनकी यह आवाज़ सुनकर उनके माता पिता बहुत ही ज्यादा खुश हुए।
  6. अल्बर्ट आइंस्टाइन को बच्चो के साथ खेलना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। ये अपनी एक अलग ही दुनिया में रहते थे, जिसमे यह पेड़ – पौधों और ब्रह्मांड के बारे में सोचा करते थे।
  7. इनके मन में हजारों प्रश्न उठते कि ये दुनिया कैसे चलती है। अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) के मन में यह जिज्ञासा तब आई जब ये 5 वर्ष के थे। और इस जिज्ञासा बढ़ने का कारण यह था कि इनके पिता ने अल्बर्ट आइंस्टाइन को एक Magnetic Compass लाकर दिया था।
  8. अल्बर्ट आइंस्टाइन उस Compass को देखकर बहुत खुश हुए। और उन्होंने उस Compass में एक चीज देखी जिसे देखकर वो बहुत हैरान हुए कि Compass की सुई हमेशा उत्तर हुई दिशा में क्यों आकर रुक जाती है। ये सवाल हमेशा उनके मन में आते रहते थे। कि ऐसा क्यों होता है? 
  9. उनके इतने देर से बोलने होने वाली कठिनाई के कारण उन्होंने स्कूल जाना बहुत देर से आरंभ किया।
  10. उन्हें स्कूल जेल जैसा प्रतीत होने लगा था, क्योंकि वहां हमेशा आधा अधूरा ज्ञान दिया जाता था। और वो वहां पढ़ाने और समझाने से ज्यादा किताबी ज्ञान को रटाने की कोशिश करते थे।जिसकी वजह से वो हर दिन एक नया अर्थात् अजीब और गरीब से प्रश्न करते थे, और वो ये पूछते थे कि ऐसा क्यों होता है, और कैसे होता है। यहीं कारण था कि वह अध्यापक उन्हें मंद बुद्धि खने लगे थे।
  11. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) को बार – बार मंद बुद्धि बोलने के कारण वो अपने आप को समझने लगे थे कि अभी इनकी बुद्धि का विकाश अच्छे तरीके से नहीं हुआ है।
  12. अल्बर्ट आइंस्टाइन के मन में एक ख्याल आया कि वो अपनी इस दुविधा को कैसे दूर करें, तब वो अपने क्लास के अध्यापक के पास गए, और उन्होंने उनसे पूछा कि में अपने बुद्धि का विकास कैसे करूं।
  13. तब उनके अध्यापक ने अल्बर्ट आइंस्टाइन के प्रश्न का उत्तर दिया, कि ” अभ्यास ही सफलता का मूल मंत्र है।” 
  14. फिर उन्होंने अपने अध्यापक के बताएं गए रास्ते पर चलना आरंभ कर दिया। और उन्होंने दृढ़ निश्चय करके बोला कि वो एक दिन एक सफल व्यक्ति बन कर दिखाएंगे। और यह आगे बढ़ने की चाह लेकर उन्होंने पढ़ना आरंभ किया।
  15. पढ़ने में मन न लगने कि वजह से वो बिल्कुल भी परेशान न होकर वो पुनः पढ़ना आरंभ के देते थे। वे लगातार कोशिश करते रहते थे।
  16. फिर कुछ समय बाद उन्हें उनके लगातार प्रयास से सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे थे। और इस बदलाव अर्थात विकास को देखकर उनके अध्यापक हैरान रह गए थे।
  17. फिर उन्होंने आगे चलकर अपने अध्ययन के लिए गणित जैसे कठिन विषय को चुना। लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी शिक्षा में थोड़ी सी कमी उत्पन्न हुई।
  18. आपको यह पता है, कि अल्बर्ट आइंस्टाइन शोक और मोक्ष पर एक भी पैसे नहीं खर्च करते थे।
  19. एक बार की बात है कि अल्बर्ट आइंस्टाइन कहीं जा रहे थे तो वहां अचानक बारिश होने लगी और उनके पास छाता भी नहीं था। फिर उन्होंने अपने सिर से टोपी को हटाकर अपने हाथो कोहनियों में दबाकर बारिश से बचने के लिए वो थोड़ा तेज़ी – तेज़ी चलने लगे और वो काफी हद तक भीग चुके थे। फिर उन्हें इस हालत में  एक सज्जन व्यक्ति ने देखकर बोला कि आप बारिश में भीग गए है, लेकिन आप बारिश से बच भी सकते थे, पर आप अपने टोपी को सिर में लगाकर, उसे भीगने से बचा रहे है क्यों? तब इस बात का अल्बर्ट आइंस्टाइन बे उत्तर दिया कि, मै यदि भीग जाता तो मै सूख भी जाता, लेकिन मैंने अपनी टोपी को इसलिए भीगने से बचाया क्युकी वो भीग जाती तो, मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मै उसे ख़रीद सकूं।
  20. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) ने अपने कड़ी मेहनत और बुद्धिमानी से गणित और भौतिक में महारत हासिल कर ली। और उन्होंने कहा समय के साथ साथ आपको अपनी शिक्षा हमेशा याद रखनी चाहिए चाहे आप सब कुछ भूल गए हो।

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  1. अल्बर्ट आइंस्टाइन समय के साथ इतने बुद्धिमान हो गए थे कि उन्होंने बहुत सारी अदभुत खोजे की, जिस वजह से दुनिया उन्हें सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान ऊर्जा का समीकरण (E = mc2) के नाम से जानती है।
  2. इन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी और प्रकाश विद्युत उत्सर्जन का खोज किया। और इसके लिए अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) को सन् 1921 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  3. सन् 1952 में अल्बर्ट आइंस्टाइन को अमेरिका ने इजरायल का राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव रखा। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टाइन यह बात बोलकर मना कर दिया कि को राजनीति के लिए नहीं बने है।
  4. उन्होंने आखिर में पूरे संसार को दिखा ही दिया कि एक मंदबुद्धि बालक भी अपनी मेहनत, लगन और परिश्रम के दम पर पूरी दुनिया में कुछ भी के सकता है।
  5. ये इतने Intelligent थे कि अल्बर्ट आइंस्टाइन पूरे मस्तिष्क में Research को Imagine करके पूरा योजना बना लेते थे। जो उनके द्वारा लैब में प्रयोग से भी ज्यादा सटीक होता था। और इसी कारण से वह इतिहास के सबसे Intelligent व्यक्ति माने जाते थे।
  6. सायद यहीं एक कारण था कि अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिन 14 मार्च में Genius Day के नाम से बड़े धूमधाम से  मनाया जाने लगा।
  7. परंतु अल्बर्ट आइंस्टाइन का मानना था कि हर एक इंसान Genius है। लेकिन आप किसी मछली को पेड़ पर चढ़ने की योग्यता से जज करोगे तो वह अपनी पूरी जिंदगी यह सोचकर जिएगी कि वो मूर्ख है।
  8. अल्बर्ट आइंस्टीन को अपने निजी गतिविधियो के होने कारण उन्हें जर्मनी छोड़कर अमेरिका जाना पड़ा।
  9. वहां बड़े बड़े विश्वविद्यालयो ने उन्हें आचार्य का पद देना चाहा। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टाइन ने प्रिंसटन नामक विश्वविद्यालय को उसके शान्त स्वभाव और बौद्धिक वातावरण के कारण चुना।
  10. जब अल्बर्ट आइंस्टाइन वहां पहुंचे तब उन्हें वहां के प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे बोला कि आप अपने प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों की सूची दे दीजिए। ताकि आपके Work के लिए ये जल्द से जल्द उपलब्ध करा दिया जाए।
  11. फिर इस बात पर अल्बर्ट आइंस्टाइन ने बड़ी समझदारी से बोला कि मुझे एक ब्लैकबोर्ड, चोक, कागज और पेंसिल दे दीजिए। यह बात सुनकर अधिकारी के होश उड़ गए। और फिर अल्बर्ट आइंस्टाइन ने बोला मुझे एक बड़ी टोकरी भी लाकर भी दीजिए, क्योंकि मुझसे बहुत सारी गलतियां भी होती है। और छोटी टोकरियां गलती से बहुत जल्दी भर जाती है।
  12. अल्बर्ट आइंस्टाइन को गलतियां करने से बिल्कुल भी डर नहीं लगता था। ये कहते थे कि को लोग गलती नहीं करते है, वो कभी कुछ सीखने का प्रयास ही नहीं करते है।
  13. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) बहुत अलग अलग तरीके के Experiment किया करते थे। इनका प्रयोग करने का तरीका एक दूसरे से काफी अलग रहता था।
  14. उनका कहना यह था कि एक ही चीज को बार – बार करना और उसका परिणाम हर बार अलग – अलग आना। यह एक बहुत अच्छा कारण था। ये बहुत बुद्धिमान और मेहनती वैज्ञानिक थे।
  15. हमारे बुद्धिमान आइंस्टाइन की याददाश्त बहुत ही कमजोर थी। ये अपना तारीख़ और मोबाइल नंबर याद करने में बहुत परेशानी होती थी।
  16. जब आइंस्टाइन के सहकर्मी ने उनका मोबाइल नंबर पूछा तो, उन्होंने पास रखी एक टेलीफोन डायरेक्ट्री में अपना मोबाइल नंबर ढूंढने लगे। यह देखकर सहकर्मी को बहुत हैरानी हुई। और वह उनसे पूछने लगा कि आपको अपना मोबाइल नंबर नहीं याद हैं, तो आइंस्टाइन में उत्तर दिया नहीं मुझे नहीं याद है। भला क्यों मै ऐसी चीजों को याद रखूं जो मुझे किताब में आसानी से प्राप्त हो जाती है।
  17. ये पता नहीं क्यों लोगो से किए गए व्यावहारिक बातों को भी भूल जाते थे।
  18. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) को हृदय और किडनी से सबंधित बीमारियां थी जिसके कारण, अप्रैल सन् 1955 में 76 वर्ष की उम्र में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन की अमेरिका में New Jersey नामक स्थान में मृत्यु हो गई।
  19. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) ने अपने पूरे जीवन में सैकड़ों किताबें और लेख प्रकाशित किए। आइंस्टाइन ने 300 से अधिक वैज्ञानिक और 150 गैर – वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किया।
  20. Present टाइम में हम जो भी वैज्ञानिक उपकरण अपने दैनिक में उपयोग कर रहे है। और हमे जो जानकारियां इंटरनेट और सैटेलाइट कि मदद से मिल रही है। इन सभी आविष्कारों में आइंस्टाइन का बहुत बड़ा हाथ है।
  21. आइंस्टाइन के दिए गए सिद्धांतो द्वारा ही हमें आज नए – नए अविष्कार को देखना संभव हो पा रहा है।
  22. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) का सबसे ज्यादा दुःख तब हुआ था जब उनके आविष्कारों के कारण काफी समय बाद जब परमाणु बम बना, तो उसके कारण हिरोशिमा और नागासाकी जैसे नष्ट पूरी तरह से नष्ट हो गए थे।
  23. अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein Biography in Hindi) के मृत्यु होने के बाद उनके शव परीक्षण के बाद एक रोम वज्ञानिक ने बिना उनके परिवार से अनुमति लिए बिना ही उनका दिमाग निकाल लिया था और यह अनैतिक कार्य डॉक्टर थॉमस हार्वे ने उनके दिमाग पर Research करने के लिए किया था।
  24. इसके पश्चात आइंस्टाइन का दिमाग करीब 20 वर्ष तक एक जार में बंद कर दिया गया था।
  25. सन् 1975 में उनके बेटे Hans के अनुमति से उनके पिता के दिमाग को 240 भागो में बांटकर कई वैज्ञानिकों के पास भेजा गया। फिर उन्होंने जांच के जरिए जाना की उनके दिमाग में आम मनुष्य से ज्यादा सेल्स मौजूद थे।

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इनके भूल से जुड़े कुछ किस्से –

  • एक बार की बात यह है कि जब अल्बर्ट आइंस्टाइन प्रिंसटन नामक विश्वविद्यालय में कार्य कर रहे थे, तभी वह वहां से अपने घर की ओर लौट रहे थे, तभी अचानक से वो अपना घर का पता ही भूल गए थे। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रिंसटन के बहुत से लोग आइंस्टाइन को जानते थे, लेकिन जिस टैक्सी में वो बैठे थे वो व्यक्ति उन्हें नहीं जानता था, तब आइंस्टाइन ने ड्राइवर से पूछा क्या तुम अल्बर्ट आइंस्टाइन का घर जानते हो, तो उसपर ड्राइवर ने जवाब दिया कि प्रिंसटन में भला कौन उनका पता नहीं जानता तो उसने बोला कि आप उनसे मिलना चाहते है तो मै आपको उनके घर छोड़ दूंगा, तभी आइंस्टाइन ने बताया कि वो अल्बर्ट आइंस्टाइन है। और उन्होंने बताया कि वो अपने घर का पता भूल गए थे, तभी ड्राइवर ने उन्हें उनके घर पहुंचाया। आइंस्टीन के बार बार कहने पर भी ड्राइवर ने पैसे नहीं लिये।
  • फिर एक बार आइंस्टाइन प्रिंसटन से कहीं जाने के लिए ट्रेन से सफर कर रहे थे, तो जब उनके पास टिकट चेक कर्मी उनके पास आया तो वह इधर – उधर अपना टिकट ढूंढने लगे उन्होंने काफी देर तक ढूंढा तो, इसी बात पर टिकट चेकर ने बोला कोई बात नहीं वैसे आप पर भरोसा है कि आप टिकट खरीदे होंगे यह बोलकर वो आगे बढ़ गया फिर कुछ देर बाद उसने देखा कि वो अपने सीट के नीचे फिर से ढूंढने लगे थे, फिर से उसने है कहा कि Sir कोई बात नहीं आप बिल्कुल भी चिंता मत करिए आपसे टिकट के बारे में कोई नहीं पूछेगा, तभी उन्होंने बताया कि टिकट नहीं मिलेगा, तो मुझे पता कैसे चलेगा कि मुझे जाना कहा है। असल में वो भूल गए थे कि वो कहां कहां जा रहे थे।

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अल्बर्ट आइंस्टाइन के अनमोल विचार –

  1. जो व्यक्ति छोटी छोटी बातों में सच को गंभीरतापूर्वक नहीं लेता है उसपर बड़े बड़े मशलो पर भरोसा भी बिल्कुल नहीं किया जा सकता है।
  2. ईश्वर के सामने हम सब एक बराबर बुद्धिमान भी है और तो और मूर्ख भी एक बराबर ही है।
  3. जैसे ही आप सीखना बंद कर देते है, वैसे ही आप मरने कि और एक कदम बढ़ा रहे होते है।
  4. कल्पना ज्ञान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
  5. जब आप एक अच्छी लड़की के साथ बैठे हो तो  आपको उसके साथ बिताया हुआ 1 घंटा 1 सेकेंड के समान लगता है, और जब आप धधकते अंगारे पर बैठे हो तो आपको 1 घंटा 1 सेकेंड के समान लगता है। यही जीवन की सापेक्षता है।
  6. यदि आप चाहते है कि आपके बच्चे बुद्धिमान ही तो उन्हें परियो की कहानियां सुनाए, और आप चाहते है कि आपके बच्चे और बुद्धिमान हो तो उनको और भी पारियों कि कहानियां सुनाएं।
  7. जहाज एक किनारे पर ही सुरक्षित रहता है, पर वो इसलिए नहीं बना होता है।
  8. जीवन एक साइकिल चलाने की तरह है, जिसमे आपको अपना बैलेंस बनाने रखने के लिए आपको निरंतर चलाते रहना होता है।
  9. सिर्फ दूसरो के लिए जीवन जीना ही एक सार्थक जीवन है।
  10. मुझे मैं जो हूं उसे छोड़ना पड़ेगा, ताकि वो मैं बन सकूं जो आगे बनूंगा।

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Anamika Garg

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