chief of defence staff

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff)

जनरल विपिन रावत

  • 31 दिसंबर 2016 को सेना प्रमुख का पद संभाला तथा सेनाध्यक्ष के पद से 31 दिसंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुए।
  • सेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने पाकिस्तान नियंत्रण रेखा, चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा और पुरोत्तर में विभिन्न संचालनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
  • विपिन रावत सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला और एनडीए खडकवासला के पूर्व छात्र रहे हैं।
  •  दिसंबर 1978 में 11 वीं गोरखा राइफल के लिए पांचवीं बटालियन में कमीसन दिया गया और उन्हें  ‘स्वार्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।
  • उनके पास अशांत और कठिन भौगोलिक स्थित का व्यापक अनुभव रहा है। उन्होंने  पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ इंकैंट्री बटालियन की कमान, राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर, कश्मीर घाटी में इन्फैंट्री डिवीजन तथा उत्तर पूर्व में एक कोर की कमान  संभाली।
  • उन्होनें अनुदेशत्मक कार्यकाल सैन्य संचालन निदेशालय में स्टाक अधिकारी तथा सैन्य सचिव सखा में कर्नल सैन्य सचिव की जिम्मेदारी संभाली।
  • जनरल विपिन रावत डिफेंस सर्विसेज स्टाॅक कॉलेज, वेलिंगटन से स्नातक हैं। तथा उच्च कमान और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज कोर्स पूरा किए हैं।
  • जनरल विपिन रावत ने ‘ राष्ट्रीय सुरक्षा और लीडरशिप’  पर कई लेख भी लिखे हैं तथा सैन्य मीडिया रणनीतिक अध्ययन भी लिए हैं।
  • उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,मेरठ  से पीएचडी भी किया है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के कार्य और अधिकार

  • सीडीएस के नेतृत्व में अलग अलग क्षेत्रों में काम संघ कि सशस्त्र सेना, नौ सेना और वायु सेना मुख्यालय और डिफेंस स्टाफ मुख्यालय भी शामिल है।
  • प्रादेशिक सेना, थल सेना, नौ सेना और वायु सेना से जुड़े कार्य भी सीडीएस के नेतृत्व में होंगे।तथा सेवाओं के लिए विशिष्ट खरीद की जिम्मेदारी भी सीडीएस के द्वारा होगी।
  • नई शुरुआत, सैन्य बलों में साझी, सोच विकसित करने की जिम्मेदारी तथा सैन्य सेवाओं की खरीद, प्रशिक्षण और स्टाॅक की नियुक्ति प्रक्रिया में समन्वय लाना शामिल होगा।
  • सीडीएस चीफ ऑफ स्टॉक कमेटी के स्थाई अध्यक्ष होंगे। तीनों सैन्य सेवाओं के लिए प्रशासनिक देख रेख करेगा।
  • तीनों सेवाओं से जुड़ी एजेंसी, संगठनों, साइबर और स्पेस से संबंधित कार्यों की कमान संभालेंगे।
  • सीडीएस रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद और एनएसए की अध्यक्षता वाली रक्षा नियोजन समिति के सदस्य होंगे। परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाॅक तीनों सेनाओं के प्रमुखों का कमान नहीं करेंगे और ना ही किसी अन्य सैन्य कमान के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे।

इतिहास

  • देश में सीडीएस बनाने की चर्चा दो दशक पहले शुरू हुई। 1999 में कारगिल युद्ध के बाद के सुब्रमण्यम समिति ने सीडीएस पर अनुशंसा की।
  • 2012 में नरेश चंद्रा समिति ने सी ओ एस सी  का चेयरमैन बनाने का सुझाव दिया।
  • अब तक तीनों सेना प्रमुखों में सबसे सिनियर चीफ ही सी ओ एस  सी के अध्यक्ष के रूप में कार्य करता था। सी ओ एस सी की भूमिका अतिरिक्त और कार्यकाल बहुत छोटा होता था।

भारतीय थल सेना (इतिहास)

  • भारतीय थल सेना की शुरुवात ईस्ट इण्डिया कम्पनी से हुई थी। बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना में परिवर्तित हुई।
  • आजादी के बाद राज्यो की सेना की जोड़ राष्ट्रीय सेना का निर्माण किया गया।
  •  15 जनवरी 1949 को आजाद भारत की सेना का गठन हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल ‘केएम करियप्पा’ पहले कमांडर इन चीफ बने।
  • हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है।

भारतीय वायु सेना (इतिहास)

  • 8 अक्टूबर 1932 को आधिकारिक तौर पर गठन हुआ। पहले एयरफोर्स का नाम रॉयल इंडियन एयफोर्स था। पहली वायुसेना की उड़ान 1 अप्रैल 1933 को भरी गई। इसी दिन पहले हवाई दस्ते का गठन हुआ। जो नंबर एक स्क्वार्डन का हिस्सा बनी।
  • दुनिया में आज भारतीय वायुसेना चौथे नंबर पर है।
  • 1932 में भारत के पास केवल चार वेस्टलैंड वापिती  आईआईए एयरक्राफ्ट थे। तब एयरफोर्स का केवल एक ही दस्ता था। आरएफ के 6 हैंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाही शामिल थे।

भारतीय नौ सेना (इतिहास)

  • 1612 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने युधकारिनी सेना का गठन किया था।
  • 1686 में इसका नाम बंबई मरीन हुआ।
  • 1830 में बंबई मरीन को ‘ हर मजेस्टी इंडियन नेवी’  का नाम दिया गया।
  • 1892 में रॉयल इंडियन मरीन कहलाया।
  • 1934 भारतीय नौ सेना अनुशासन अधिनियम पारित हुआ जो रॉयल इंडियन नेवी कहलाया।

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Avanish Mishra

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