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मंगल ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य – Facts About Mars Planet in Hindi

मंगल ग्रह (Mars Planet) को हम सब जानते हैं। मंगल पृथ्वी के समान ही एक ग्रह है जिस पर पृथ्वी की तरह जीवन संभव हो सकता है। Mars Planet पर हुए विभिन्न शोधों से यह पता चला है कि यहां पर करोड़ों अरबों साल पहले जीवन रहा होगा।

मंगल ग्रह के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और विशेषताएं इस प्रकार है :-

  • Solar System में मंगल ग्रह सूर्य से चौथे स्थान पर है इसे Red Planet कहा जाता है।पृथ्वी  से देखने पर यह Red color  का दिखाई देता है।
  • पृथ्वी से इसे हम नंगी आंखों से देख सकते हैं। आयरन ऑक्साइड के कारण इसका रंग लाल होता है। यहां की मिट्टी में सिलिकेट की मात्रा अधिक है।
  • मंगल ग्रह का नाम रोमन के युद्ध  देवता के नाम पर मार्स रखा गया।
  • Mars Planet का कुल Surface Area पृथ्वी के Dry Surface Area के बराबर है। इसकी कोर Dense Metallic Material की बनी है इसकी Radius 1700 km है।
  • इसकी कोर में मुख्य रूप से नीकिल, आयरन और सल्फर उपस्थित है इस ग्रह की कोर के ऊपरी हिस्से में  Silicate से बनी मैंटल की परत है। ये कोर से कम Dense है मंगल ग्रह की ऊपरी परत क्रस्ट है इसकी Thickness 50 km है।
  • आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, सिलिकॉन और ऑक्सीजन है। मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन की मात्रा न के बराबर है। इसकी दूसरी परत मैंटल सीलिकेट से बनी है और तीसरी (बाहरी कोर) तथा चौथी (आन्तरिक कोर) लोहे और निकिल की बनी है।
  • Mars Planet की सतह चट्टानी है जो आयरन ऑक्साइड की अधिक मात्रा से भरी है। यहां पर Solar System के बहुत विशाल तूफान भी आते हैं जो महीनों तक चलते हैं और इसे कई महीनों तक ढके रहते हैं।मंगल ग्रह सूखा और धूल वाला ग्रह है।
  • 2003 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के यान मार्स एक्सप्रेस ने सबसे पहले मंगल ग्रह के वातावरण में मीथेन गैस का पता लगाया था। यह एक रंगहीन, गन्धहीन और अत्यधिक ज्वलनशील  गैस है और  Biological Molecule भी है।
  • Mars Planet पर मीथेन का मिलना एक बड़ी खोज थी क्योंकि मीथेन एक बायोकेमिकल प्रक्रिया से बनती है यह एक बड़ा प्रमाण हो सकता कि मंगल पर आज भी जीवन है।  मीथेन  मंगल पर अलग अलग हिस्सों से निकल रही थी। क्यूरियोसिटी रोवर ने भी मंगल पर  मीथेन गैस  होने कि पुष्टि की।
  • गरमियों में Mars Planet के उत्तरी भाग में लगभग 19000 metric ton मीथेन गैस release  होती है। लेकिन मंगल पर अभी तक जीवन के कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिले हैं इसलिए यह माना जाता है कि मंगल पर मीथेन  उसमे होने वाली आन्तरिक प्रक्रियाओं की वजह से भी उत्पन्न हो सकती है यह आन्तरिक प्रक्रिया जैसे हानिकारक पराबैंगनी किरणों के कारण भी  हो सकती है परन्तु अभी तक इसके कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।
  • माना जाता है कि Mars Planet पर Climate Change  होने के कारण यहां जीवन अस्त व्यस्त हो गया। और माना जाता है कि लगभग चार Billion पहले यहां का Magnetosphere अचानक से गायब हो गया  जिससे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणें और Radiation इसके Atmosphere पर पड़ा और इस कारण भी जीवन समाप्त होता गया।
  • Mars Planet पर Solar System की बहुत ही विशाल और गहरी घाटी है। यह घाटी 600 km लंबी, 30 km चौड़ी और 10 km गहरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस घाटी का निर्माण मंगल ग्रह के Crust और Plate के खिंचाव तथा फैलाव के कारण हुआ है। उनका यह भी मानना है कि इस घाटी के अंदर और भी घाटियां हो सकती हैं।
  • मंगल ग्रह पर पृथ्वी की तरह दिन भी होता है जो 24 hrs 37 min का होता है यह पृथ्वी से 37 min  ज्यादा है।
  • Mars Planet अपने  Rotational Axis 25.19° पर झुका है। जो पृथ्वी के Rotational Axis से ज्यादा है। जिसके कारण यहां भी मौसम बदलता रहता है। यहां भी चार ऋतुएं होती हैं। जिनका समय पृथ्वी के समय से दोगुना होता है।
  • पृथ्वी के जैसे ही Mars Planet पर भी सर्दी और गर्मी होती है इसका औसतन Temperature -55°c है  सर्दी में अधिकतम Temperature -87°c और गर्मी में -5°c होता है। मंगल ग्रह पृथ्वी के अनुसार बहुत ठंडा रहता है।
  • पृथ्वी की तुलना में मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम है।  यह पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल का 38% ही है। जिसके  कारण वहां पर आसानी से नहीं रहा जा सकता। जैसे – पृथ्वी पर किसी व्यक्ति का वजन 100 kg  है तो मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसका वजन 37 gm होगा।
  • Mars Planet सूर्य से 1.52 गुना ज्यादा दूर है जिसके कारण सूर्य की 43% लाइट ही वहां पहुंच पाती है।
  • Mars Planet 687 दिनों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है मंगल ग्रह का एक साल पृथ्वी के दो साल के बराबर होता है।
  • Solar System का सबसे बड़ा ज्वालामुखी मंगल ग्रह पर है। जो एवरेस्ट से लगभग तीन गुना ऊंचा है। इसे Olympus Mons कहते हैं। यह 21 km ऊंचा और 600 km व्यास का है।
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  • मंगल ग्रह पर चन्द्रमा की तरह दो उपग्रह भी हैं। Phobos और Deimos। इनकी खोज 1877 में हुई थी। इनके Size और Shape हमेशा Change  होते रहते हैं। Phobos Deimos से बड़ा है और ये धीरे-धीरे मंगल ग्रह की ओर झुक रहा है करोड़ों सालों में  माना जा रहा है कि यह मंगल ग्रह से टकराएगा और इसके चारों तरफ एक layer बना लेगा।
  • Solar system में Phobos सबसे कम दूरी वाला उपग्रह है। जो मंगल ग्रह से 6000 km दूर है जबकि चन्द्रमा पृथ्वी से 3,84000 km दूर है।
  • मंगल ग्रह पर  95% कार्बनडाइऑक्साइड, 3% नाइट्रोजन, 1.6% ऑर्गन है। ऑक्सीजन और जल बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है।
  • मंगल ग्रह पर भेजे गए सेटेलाइट की मदद से बहुत सी जानकारियां मिली हैं। इससे मंगल ग्रह के Maps, प्राकृतिक घटनाओं, तूफानों और वातावरण में उपलब्ध Hydrogen Isotops और Methane का  बहुत नजदीकी से पता चला है।
  • मंगल ग्रह के लगभग एक तिहाई Mission ही Success हुए हैं। Mariner 9, 13 नवंबर 1971 में भेजा गया एक कृत्रिम उपग्रह था। जिसने  मंगल ग्रह  की कक्षा में प्रवेश किया था और 7329 photos ली थी।
  •  मार्स एक्सप्रेस एक कृत्रिम उपग्रह है जिससे यह पता चला कि मंगल ग्रह के दोनों ध्रुवों पर बर्फ है और वहां पर पानी और बर्फ की एक सतह है।
  • अब तक जितने भी कृत्रिम उपग्रह मंगल ग्रह पर भेजे गए हैं उनसे यह पता चला है कि मंगल ग्रह पर जल मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये नदियां, झील, महासागर भी हो सकते हैं। जिनसे जल मिलने की संभावना बढ़ गई है।
  • मंगल ग्रह पर जीवन संभव है यह पता लगाने के लिए 8 आभियान हुए जिसमें से 7 अमेरिका और एक इंडिया का था।
  • नासा ने मंगल ग्रह पर दो एक्टिव रोवर क्यूरियोसिटी और ऑपर्च्युनिटी रोवर भेजे हैं ये मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश कर रहे हैं।
  • अब तक मंगल ग्रह पर बहुत सारे देशों द्वारा Mission हुए हैं जिनमे से 4 देशों के मिशन ही सफल हुए हैं।  

            Indian space and science Agency (ISRO)

            American space agency (NASA)

            European space agency (ESA)          

            Russion space agency (ROSCOMOS)

  • 4 नवंबर 2013 को इसरो ने मार्स ऑर्बिटर मिशन लांच किया। यह भारत का पहला सफल परीक्षण था।मंगलयान 65 करोड़ किलोमीटर की दूरी करके 24 सितम्बर 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचा और मंगल पर जीवन से जुड़ी संभावनाओं और उनसे जुड़े रहस्यों की खोज कर रहा है। यह अभी भी मंगल ग्रह ही कक्षा में चक्कर लगा रहा है। जो भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस प्रकार भारत दुनिया में चौथे स्थान पर मंगल पर पहुंचने वाला देश बना तथा यह एशिया महाद्वीप का पहला देश भी बना।
  • भारत अब मंगलयान-2 भेजने की तैयारी में है भारत मंगलयान-2 को 2024 तक लांच करेगा।
  • Future में नासा से दो मिशन Mars 2020 और Inside Rover तथा European Space Agency से Ekmersh Rover भेजा जाएगा। अतः उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में मानव अपने कदम मंगल ग्रह पर रख देगा।
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Sadhana Kumari

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I am a content writer and blogger. I like to write short articles in the fields of Innovation, Technology and Biography. My hobbies are watching the news, cooking and reading the failure stories.

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