achievement

बड़ी सफलता तक कैसे पहुंचें? – Signature Money Luck

जीवन में आगे बढ़ने के लिए हर कोई  लगातार काम या प्रयास करता रहता है। Success का कोई shortcut नहीं होता। इसे पाने के लिए हमें लगातार मेहनत करनी पड़ती है। किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए इंसान को अपनी मंजिल का भी पता होना चाहिए। इसके बिना की गई कोशिश इंसान  को असफलता की ओर ही ले जाता है।

किसी भी कैरियर में बहुत आगे बढ़ने के बाद कई लोग career shift करने के बारे में सोचने लगते  हैं। वो normal life style से कुछ अलग करना चाहते हैं जो उनको पसंद हो। तो इस तरह के career shift में न केवल खतरा रहता है बल्कि यह career का एक ऐसा मोड़ रहता है जहां से आप पर आर्थिक रूप से बहुत बोझ भी रहता है बहुत जिम्मेदारियां भी रहती हैं।

ऐसे में अगर आप बदलाव कर रहे हैं तब इन बातों का जरूर ख्याल रखें। ऐसा न हो कि सिर्फ बदलाव के लिए आपने career shift  कर लिया पर बाद में लगा कि अपने हाथों से अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।

Money Is Not Everything

  • Career बदलते समय अगर आप यह सोचते हैं कि आप जो present  में काम कर रहे हैं उसमें पैसा कम है और career shift के बाद ज्यादा पैसा मिल जाएगा तब आप गलत दिशा में सोच रहे हैं। हर एक कैरियर में अलग-अलग तरह की प्रक्रियाएं रहती हैं आगे बढ़ने के लिए। इस कारण पैसे को ही देखकर career shift न करें।

दूसरों की देखा देखी ना करें

  • यह अकसर देखा गया है कि कोई इंसान लगातार पांच-आठ सालों तक एक ही कंपनी में काम कर रहा है और कंपनी में काम करने वाले उसके एक साथी ने career shift किया क्योंकि उसे मीडिया में काम करने की इच्छा थी। साथी ने career shift किया है इसलिए आप भी करें यह जरूरी नहीं। आप अपनी सुविधा अपना आराम देखे और फैसला लें।

अपनी Ability को पहचानें

  • कई बार कुछ लोग जोश में आकर कैरियर shift करने के बारे में सोचने लगते हैं और उस पर अमल भी कर देते हैं। जब वे दूसरे कैरियर के लिए काम करने जाते हैं तब वो uncomfortable महसूस करते हैं। यह इसलिए भी होता है क्योंकी आपको अपनी  ability पता ही नहीं होती है।
  • कैरियर shift करने के पहले इन बातों पर जरूर ध्यान दें कि क्या सच में आपमें उतनी क्षमता है। किसी option को सिर्फ इसलिए ना choose करें क्योंकि वह आपके लिए last option है। अगर आप confuse हैं तो खुद को देखे पहले की आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं मतलब पहले  खुद का आंकलन करें और फिर फैसला लें।

नई डिग्री लेने से पहले क्या करें ?

  • बहुत से लोग  पांच साल के कैरियर के बाद अपने पसंद के कैरियर में जाने के लिए नई डिग्री लेने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। लेकिन आपको  इस बात पर ध्यान देना चाहिए  कि आप पांच साल बाद फिर पढ़ाई करने जा रहे हैं। डिग्री आपके लिए फायदेमंद भी साबित हो सकती है और इससे आपको नुकसान भी हो सकता है क्योंकि आप डिग्री पाने  के लिए अलग ध्यान लगा रहे हैं और present में जो काम कर रहे हैं उस पर आप ध्यान नहीं दे पाते हैं।
  • ऐसे में आप न इधर के रहते हैं और उधर के। कैरियर में बदलाव संबंधी बड़े फैसले अपने आप न करें। इस संबंध में अपने परिवार के बड़ों से और दोस्तों से बात करें। हो सकता है आपकी इस समस्या में वे आपकी ज्यादा अच्छे से मदद कर पाएं। 

 Focus बढ़ाएं

  • Success होने के लिए focus करना जरूरी है। Focus यानी ‍‍किसी भी एक चीज़ पर पूरा ध्यान देना। किसी ‍व्यक्ति को तब तक success नहीं मिल सकती, जब‍ तक कि वह focus न हो। बिना intrest के focus करना भी काफी मुश्किल होता है। इसलिए सबसे पहले जरूरी यह है कि हम अपना intrest बढ़ाएं।

Time management

  • Successful  बनने में समय का काफी महत्व है। जिसने समय के महत्व को जान लिया उसने सब कुछ पा लिया।मतलब किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए time management बहुत जरूरी है। किसी विद्वान ने ठीक ही कहा है कि ‘मैंने समय को खोया, समय ने मुझे’। इसी से पता चलता है कि समय कितना कीमती है। यह भी कहा गया है कि समय ही सोना (Gold) है इसलिए समय को बरबाद न करें।

अपनी Strength को जानें

  • अपनी strength का हमें पता होना चाहिए। हमेशा अपनी Strength के according ही हमें अपना goal चुनना चाहिए। कभी भी ऐसा goal चुनने की गलती नहीं करनी चाहिए, जो खुद की strength से बाहर हो। उदाहरण के लिए किसी का intrest art subject में success पाने  की हो तो उसे जबरदस्ती इंजीनियरिंग या डॉक्टरी के लिए कोशिश नहीं करना चाहिए।

काम करते रहें

  • Success पाने के लिए हमें लगातार काम करते रहना चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि ‘कर्म मानव स्वतंत्रता की शाश्वत घोषणा है। हमारे विचार, शब्द और कर्म ऐसे धागे हैं जिनसे हम अपने चारों ओर एक जाल बुन लेते हैं। हमें अपना काम सही और अच्छी दिशा में ही करना चाहिए।’ सही का सही और गलत दिशा का परिणाम भी गलत ही होता है।

Hopeful बने रहें

  • इंसान को हमेशा hopefu ही बने रहना चाहिए। Negative thoughts कभी भी मन में न लाएं इससे self confidence कम होता है इसलिए हमेशा hopeful  ही बने रहें । इस बारे में काफी पुरानी एक कहावत भी है कि ‘मन के जीत है और मन के हारे हार’। इसलिए positive thought अच्छा  रहेगा।

जी-जान से भिड़ जाएं

  •  पहले हमें अपना goal decide कर लेना चाहिए और एक बार goal तय हो जाने के बाद आप जी-जान से उसके पीछे  भिड़ जाएं। इसमें कोताही बरतना अच्छा नहीं होता है। अपने इरादों पर दृढ़ रहें व डिगें नहीं। कई बार इसमें आप fail  भी हो सकते हैं लेकिन आप अपने determination से success पा लेंगे।

ईश्वर का ध्यान करें

  • ईश्वर से प्रार्थना या ईश्वर के ध्यान का भी अपना importance है। क्योंकि इससे दिल व दिमाग दोनों शांत होते हैं। Research में भी पाया गया है कि daily मंदिर जाने तथा भगवान की पूजा करने वाले हमेशा positive बने रहते हैं, क्योंकि उनके मन में यह भाव रहता है कि ‘ईश्वर मेरे साथ है।’ यह हमें positivity की ओर ले जाता है।
  • इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक successful person बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।

पॉजिटिव सोच रखें :

  • आपने कितनी बार अपने आपसे ही यह कहा होगा ‘जिस तरह से मैं योजना बनाता हूं, वह कभी काम नहीं आती’, ‘मैं कभी डेड लाइन पर काम पूरा नहीं कर सकूंगा’, ‘मैं हमेशा काम बिगाड़ देता हूं’। इस किस्म की बातें जो आप अपने अंदर ही अंदर करते हैं उनसे ज्यादा कोई दूसरी चीज आपके जीवन को दिशा नहीं देती।
  • आपको पसंद हो या न हो, तथ्य यह है कि आप अपनी जीवन यात्रा अपने विचारों के अनुसार ही पूरी करते हैं। अगर आपके विचारों में उदासी और कष्ट भरे हैं तो आप उसी तरफ जा रहे हैं क्योंकि नकारात्मक शब्द आत्मविश्वास को ध्वस्त कर देता है। इससे न हौसला बढ़ता है और न मदद मिलती है।

अच्छा सोचें :

  • अपने नए थैरेपिस्ट से सुमन ने पहला वाक्या यह कहा- ‘मैं जानती हूं आप मेरी मदद नहीं कर सकते डॉक्टर, मैं पूरी तरह से टूट चुकी हूं। मैं workplace पर हमेशा गलतियां करती रहती हूं और मुझे यकीन है कि नौकरी से निकाल दी जाऊंगी। कल ही मेरे बॉस ने बताया कि मेरा ट्रांसफर हो गया है। उनके अनुसार यह प्रमोशन है, लेकिन अगर मैं अच्छा काम कर रही थी तो फिर ट्रांसफर क्यों किया?’
  • आहिस्ता-आहिस्ता सुमन की कहानी खुलने लगी। उसने दो साल पहले एमबीए किया था और उसे अच्छा वेतन मिल रहा था। जाहिर है यह असफलता नहीं थी। पहली मीटिंग के बाद सुमन के थैरेपिस्ट ने उससे कहा कि वह अपने विचारों को लिखे, विशेषकर रात में जब उसे सोने में कठिनाई हो रही हो। अगली मीटिंग में सुमन की सूची में शामिल था, ‘मैं वास्तव में स्मार्ट नहीं हूं। मैं तुक्के में ही आगे बढ़ गई हूं। कल तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी क्योंकि अब से पहले मैंने कोई मीटिंग चेयर नहीं की है। आज सुबह बॉस ने मुझे बहुत गुस्से में देखा, मैंने क्या कर दिया था?’
  • सुमन ने स्वीकार किया, ‘अकेले एक दिन में मैंने 26 negative thoughts लिखे। इसलिए आश्चर्य नहीं है कि मैं हमेशा थकान व डिप्रेशन महसूस करती हूं।’ सुमन के डर और अंदेशों को जब जोर से पढ़ा गया तब उसे एहसास हुआ कि वह काल्पनिक हादसों पर कितनी अधिक ऊर्जा बर्बाद कर रही है। अगर आप उदास महसूस कर रहे हैं तो निश्चित रूप से आप अपने तक negative message पहुंचा रहे हैं। आपके सिर में जो शब्द उठ रहे हैं, उन्हें सुनो। उन्हें जोर से बोलो या लिख लो ताकि negative thoughts को पक़डने में मदद मिले।
  • प्रैक्टिस करने से विचारों को बेहतर बनाने में आसानी हो जाती है। जब आप सड़क पर चल या ड्राइव कर रहे हों तो अपने खामोश ब्रॉडकास्ट को आप सुन सकते हैं। जल्द ही आपके विचार आपके इशारे पर चलने लगेंगे और आप अपने विचारों के अनुसार चलने से बच जाएंगे। जब ऐसा होने लगेगा तो आपकी भावनाएं और एक्शन भी बदल जाएंगे।

Deadly words को निकालें :

  • फरहाद की अंतरात्मा उससे कहती रहती थी कि वह केवल एक सचिव है। महेश को याद दिलाया जाता था कि वह बस एक सेल्समैन है। केवल या बस जैसे शब्दों से ये दोनों व्यक्ति अपने जॉब्स को हीन बना रहे थे। नतीजतन अपने आपको भी। इसलिए negative शब्दों को जब आप अपने जीवन से निकाल देते हैं तो उस हानि से भी बच जाते हैं जो आप अपने ऊपर कर रहे हैं।
  • फरहाद और महेश के लिए दोषी शब्द ‘केवल’ और ‘बस’ थे। जब एक बार इन शब्दों को निकाल दिया जाए तो यह कहने में कुछ भी नुकसान नहीं है- ‘मैं एक सेल्समैन हूं’ या ‘मैं एक सचिव हूं’। ये दोनों वाक्य सकारात्मक फॉलोअप के लिए द्वार खोल देते हैं जैसे- ‘मैं तरक्की की राह पर हूं’।

ज्यादा सोचने से बचें

  • जैसे ही कोई negative message आए उसे स्टॉप कहकर शॉर्ट सर्किट कर दें। ‘मैं क्या करूंगा अगर…?’ स्टॉप! थ्योरी की दृष्टि से स्टॉपिंग या रोकना एक साधारण तकनीक है। व्यवहार में यह इतनी आसान नहीं है जितनी प्रतीत होती है। रोकने के लिए आपको  काफी हिम्मत दिखानी पड़ती है। जब आदेश दें तो अपनी आवाज को ऊंचा कर लें। कल्पना करें कि आप अपने अंतरमन के डर को दफन कर रहे हैं।
  • जब व्यक्ति डिप्रेशन के मूड में होता है तो उसे हर चीज खराब लगती है। इसलिए जब एक बार आप negative thoughts पर स्टॉप कहकर विराम लगा दें तो उनकी जगह positive thoughts विकसित करें। इस प्रक्रिया को एक व्यक्ति ने इस प्रकार बताया, ‘हर रात मैं अजीब किस्म के विचारों के साथ जागता रहता- क्या मैं अपने बच्चों पर बहुत कठोर हूं? क्या मैं अपने क्लाइंट को कॉल करना भूल गया? जब इस किस्म के विचारों से मैं बहुत परेशान हो गया तो मैंने उस समय को याद किया जब मैं अपनी बेटी के साथ जू में था। चिम्पांजी को देखकर मेरी बेटी कितनी खुश थी। उसका हंसता हुआ चेहरा देखकर मुझे नींद आ गई।’

About the author

Fuggy Pandey

Fuggy Pandey

I am a content writer who specialized in writing about Facts, Technology, Life Hacks, Biography and Trending content. I'm working with a great team and have enjoyed the opportunities they have given me to help their knowledge grow.

View all posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *