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अरुणिमा सिन्हा के आत्मविश्वास और जज्बे को सलाम – Motivational Story

दोस्तों यह कहानी एक सच्ची घटना (Motivational Story in Hindi) पर आधारित है। यह एक ऐसी लड़की की कहानी है। जिसके साथ इतना बड़ा हादसा हुआ। लेकिन फिर भी उसने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और अपनी हिम्मत से कुछ ऐसा कर दिखाया। जिस पर आज पूरे भारत को गर्व है। 

ऐसे हादसे से अक्सर लोग टूट जाया करते हैं और अपनी जिंदगी का मकसद ही भूल जाया करते हैं। लेकिन इस लड़की ने अपने आत्मविश्वास (Motivational Story in Hindi) और हाैंसले से कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी वजह से आज वह बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है।

  1. यह कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर अंबेडकर नगर में रहने वाली अरुणिमा सिन्हा की है आज अरुणिमा सिन्हा को कौन नहीं जानता है। आज अरुणिमा को पहचानने के लिए किसी परिचय की जरूरत नहीं है। अरुणिमा सिन्हा अपने नकली पैर के सहारे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर जीत हासिल करने वाली पहली महिला पर्वत रोहिणी  हैं।
  1. वैसे तो अरुणिमा पहले एक फुटबॉल प्लेयर थी। जो नेशनल लेवल पर खेल चुकी थी। 21 अप्रैल 2011 की  उस रात ने अरुणिमा के जीवन को ही बदल दिया।
  1. 21 अप्रैल 2011 की रात थी। जब वह दिल्ली में सीआईएसएफ की परीक्षा देने जा रही थी। वह लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेन पद्मावती एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में सफर कर रही थी।
  1. जब ट्रेन लखनऊ से निकली तो रास्ते में कुछ गुंडे और बदमाश ट्रेन में घुस आए और यह गुंडे लोगों से पैसे छीन रहे थे और लोग चुपचाप उनकी बात मान ले रहे थे। और उन्हें पैसे,गहने सब कुछ दे दे रहे थे। और ऐसा करते करते वे गुंडे अरुणिमा के पास पहुंचे।
  1. जब वे गुंडे अरुणिमा के पास पहुंचे और उनके गले से सोने की चैन छीनने की कोशिश करने लगे तब अरुणिमा ने उनका विरोध किया और उन सबसे वह अपना बचाव करने लगी।
  1. गुंडों से बहस होते होते ट्रेन बरेली जिले में पहुंच गई तभी उन चारों गुंडों ने मिलकर अरुणिमा को ट्रेन से बाहर फेंक दिया और अरुणिमा बगल के ट्रैक से जा रही ट्रेन से टकराकर जमीन पर गिर गई और उनका एक पैर कट गया तथा दूसरे में गहरी चोट लग गई।
  1. जमीन पर गिरने के बाद वह बेहोश हो गई और उन्हें कुछ याद नहीं रहा जब उन्हें होश आया तो उन्हें दर्द हो रहा था और वह अपने आप को असहाय महसूस कर रही थी। 
  1. तभी उन्हें यह एहसास हुआ कि उन्होंने अपना एक पैर खो दिया है और उनके दूसरे में गहरी चोट लगी है।
  1. जब अरुणिमा को होश आया तो वह मदद (Story in Hindi) के लिए चिल्लाने लगी। लेकिन वहां आसपास कोई भी नहीं था। जो उनकी मदद कर सके। 

(Motivational Story in Hindi)

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  1. वह सारी रात दर्द से चिल्लाती रही और रात भर चूहे उनके पैर को कुतरते रहे। रात भर में उनके पास से 49 ट्रेनें गुजरी थी।
  1. जब सुबह हुई तो कुछ गांव वालों ने अरुणिमा को देखा और वे उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए।
  1. अरुणिमा के लिए 21 अप्रैल 2011 की रात बहुत ही बेकार थी। जिसमें अरुणिमा बहुत कुछ खो चुकी थी।
  1. इस हादसे में अरुणिमा अपना पैर, अपना सपना, अपना सब कुछ खो चुकी थी और वह बिल्कुल टूट चुकी थी।
  1. अरुणिमा को अब समझ नहीं आ रहा था कि वह अब आगे क्या करेंगी? वह तो एक अपाहिज हो चुकी हैं जो दूसरों पर निर्भर (Story in Hindi) रहने वाली हैं। लेकिन अरुणिमा हार मानने वालों में से नहीं थी।
  1. जब इस हादसे की खबर अरुणिमा के घर वालों को मिली तो मानो उनके घर में कोहराम मच गया हो। क्योंकि यह दुर्घटना दिल दहला देने वाली थी।
  1. लेकिन अरुणिमा में साहस और धैर्य की कमी नहीं थी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है।
  1. जब डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनका एक पैर काम नहीं कर रहा है और दूसरे पैर में जहर फैल गया है और वह जहर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाएगा। तब इस बात का जवाब उनकी मां के पास नहीं था। लेकिन अरुणिमा के पास इसका जवाब था।
  1. उन्होंने डॉक्टर से खुद ही कहा –   काट दो मेरा पैर। क्योंकि अब मैं और दर्द नहीं सहन कर सकती। अरुणिमा ने ऐसा इसलिए कहा – क्योंकि ट्रैक पर पड़े – पड़े वह इतना ज्यादा दर्द झेल चुकी थी। कि अब वह और दर्द नहीं सहन करना चाहती थी।
  1. अतः उनके एक पैर को काट दिया गया तथा दूसरे पैर में रॉड लगा दी गई। अरुणिमा को पहले जिस हॉस्पिटल में ले जाया गया था। 
  1. उसमें प्रोस्थेटिक पैर लगाने की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए उन्हें दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और वहां पर उन्हें प्रोस्थेटिक पैर लगाया गया। और वहां पर वह 4 महीने तक भरती रही। 4 महीने बाद वह कुछ ठीक हुई तो उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।
  1. अरुणिमा अभी अच्छे से चल भी नहीं पाती थी। इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें कुछ एक्सरसाइज और धीरे-धीरे चलने की सलाह (Story in Hindi) दी थी। जिससे उनके आर्टिफिशियल पैर पूरे शरीर के साथ कोऑर्डिनेट कर सकें।

(Motivational Story in Hindi)

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  1. यह सुनकर अरुणिमा कुछ समय के लिए हताश हो जाती थी। लेकिन उनकी मां उनका हौसला बढ़ाती और कहती कि बेटा आगे बढ़ो। इस बात पर ध्यान मत दो कि तुम्हारे साथ क्या हुआ तुम अपने लक्ष्य पर ध्यान दो।
  1. लेकिन वहीं दूसरी ओर अरुणिमा में हिम्मत और साहस की कमी नहीं थी। वह खुद ही सोचने लगी कि अगर भगवान ने इतने बड़े हादसे के बाद मुझे जीवित रखा है तो कोई न कोई वजह तो जरूर होगी।
  1. फिर क्या इसी बात पर उन्होंने ठान लिया कि वह एवरेस्ट पर चढ़ाई करेंगी और यह साबित करेंगी कि विकलांगता मन में नहीं शरीर में होती है।
  1. जब अरुणिमा चार महीने बाद  ठीक होकर हॉस्पिटल से बाहर निकली तो उन्होंने देखा कि सोशल मीडिया और अखबारों में उनके खिलाफ कई तरह कि अफवाहें फैलाई जा रही थी। 
  1. जिसमें कहा जा रहा था कि अरुणिमा के पास ट्रेन का टिकट नहीं था इसलिए वह ट्रेन से कूद गई थी। जब यह बात गलत साबित हुई।
  1. तब यह कहा जाने लगा कि अरुणिमा आत्महत्या करने के लिए ट्रेन से कूदी थी। जिसका विरोध अरुणिमा और उनके परिवार वाले मिलकर कर रहे थे। लेकिन कोई उनकी बातें नहीं सुन रहा था। क्योंंकि वह एक छोटे से परिवार से थी।
  1. तभी  इन सबको जवाब देने के लिए अरुणिमा ने एक सही तरीका चुना और कहा – मैं एक दिन यह साबित करके दिखाऊंगी कि दुर्घटना के पहले मैं क्या थी और अब मैं क्या हूं। मैं अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाऊंगी। 
  1. अरुणिमा की कहानी आत्मविश्वास न हारने (Motivational Story in Hindi) वाले जज्बे की दास्तां साबित हुई।
  1. फिर क्या था अरुणिमा खूब एक्सरसाइज और अपने पैरों पर चलने का प्रयास करने लगी। 
  1. एक्सरसाइज और चलने के दौरान उनके पैरों से खून निकलने लगता था। जिसे उनकी मां साफ कर देती और फिर से उन्हें एक्सरसाइज के लिए तैयार कर देती थी।

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  1. अरुणिमा उस समय जिस हालत में थी उस हालत में लोगों को खड़े होने में सालों लग जाते हैं लेकिन अरुणिमा मात्र 4 महीने में ही उठ खड़ी हुई। और 
  1. वह एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल से मिली और उनसे दो साल की ट्रेनिंग की।
  1. ट्रेनिंग के बाद अरुणिमा ने एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू कर दी। चढ़ाई के दौरान उनके पैर से खून निकल आता था और दर्द की वजह से वह गिर भी जाती थी। लेकिन वह हार नहीं मानती और फिर से चलने की कोशिश करने लगती। 
  1. और फिर एक दिन ऐसा आया जब उन्होंने एवरेस्ट फतह कर दिया। और उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि वह दुर्घटना से पहले क्या थी और अब क्या हैं।
  1. अरुणिमा ने 21 मई सन 2013 को मात्र 52 दिन में ही अपने प्रोस्थेटिक पैर के सहारे एवरेस्ट पर फतह हासिल की। जब अरुणिमा एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ चुकी थी तो वह खूब रोयी थी। लेकिन वे उनके खुशी के आंसू थे। कमजोरी के नहीं।
  1. इस प्रकार अरुणिमा विकलांग पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला पर्वतरोहिणी बन गई।
  1. फिर क्या था अरुणिमा ने इसी तरह अपने हौसले, साहस, आत्मविश्वास और आर्टिफिशियल पैर के दम पर धीरे-धीरे कई पर्वतों जैसेमाउंट किलिमंजारो, माउंट कोज़िअस्को, माउंट अकोंकागुआ, का स्टेज पिरामिड और माउंट एलबस जैसे पहाड़ों पर फतह हासिल की।
  1. अरुणिमा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया चुका है।
  1. अरुणिमा ने अपने पुरस्कार में मिले हुए पैसों से विकलांग बच्चों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय खेल अकादमी की स्थापना उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव में की है।
  1. अतः अरुणिमा ने अंत में अपने हिम्मत और आत्मविश्वास  के दम पर यह साबित कर दिया कि मुश्किल कितनी भी बड़ी क्यों ना हो अगर जीवन में कोई गोल बना लिया है और उसके लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं तो उसे पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं।
  1. अरुणिमा कहती हैं कि विकलांगता व्यक्ति की सोच में होती है वह कहती हैं कि लगभग सभी लोगों के जीवन में पहाड़ों से भी ऊंची कठिनाइयां (Inspirational Story in Hindi) आती हैं लेकिन जिस दिन वह सभी लोग अपनी कमजोरियों को ताकत में बदल लेंगे। उस दिन उन्हें दुनिया की कोई भी चीज़ बड़ी नहीं लगेगी।
  1. इनकी कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कमजोरी या विकलांगता हमारी सोच पर निर्भर नहीं करती है अगर हमने अपने आपको विकलांग मान लिया है तो शरीर कितना भी मजबूत क्यों ना हो हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकते और अगर हमने अपने आपको मजबूत कर लिया है और शरीर विकलांग है तो हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कोई भी कठिनाई बाधा नहीं डाल सकती।

(Motivational Story in Hindi)

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Anamika Garg

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