Nag Panchami
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आइए जानते हैं नागपंचमी क्या है और कब मनाई जाती हैं?

Hello friends, जैसा की हम सभी जानते हैं कि भारत धर्म में आस्था और विश्वास रखने वाला देश है। भारत एक कृषि प्रधान देश है।हमारे भारत में हर महीने कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है। आज हम आपको बताएंगे हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले एक विशेष त्योहार नागपंचमी की।नागपंचमी का त्योहार पूरे भारत में मनाया जाता है। लेकिन कुछ राज्यों में इस त्योहार को मनाने का अपना अलग ही महत्व है और उन राज्यों में यह त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।भारत के कई राज्यों में नागपंचमी को गुड़िया के नाम से जानते हैं।

नागपंचमी क्या है और कब मनाई जाती हैं

  • भारत के अलग अलग हिस्सों में नागपंचमी का त्योहार बहुत ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।
  • हिंदी कैलेंडर के अनुसार नागपंचमी का Festival सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी में मनाया जाता है।
  • आपको यह बात तो पता ही होगी कि हिन्दू धर्म के लोग सावन के महीने को बहुत पवित्र मानते है और इस सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा और अराधना करते है।
  • नागपंचमी के दिन नाग देवता और सांप की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। मंदिरों में शिवलिंग पर और सापों की बिल के पास दूध डालकर नागदेवता को स्नान कराते हैं।
  • लेकिन कहीं कहीं एक नई परम्परा चल गई है नागदेवता को दूध पिलाने की। शास्त्रों में सांपों को दूध पिलाने को नहीं कहा गया। सांप को दूध पिलाने से उनकी अकाल मृत्यु हो जाती है।जिससे पाप लगता है इसलिए सांप को दूध पिलाना निषेध है।
  • नाग देवता को शक्ति और भगवान सूर्य का अवतार माना जाता है। इसलिए भी प्राचीन शास्त्रों में नागपंचमी मनाने का बहुत महत्व था।
  • पुराने शास्त्रों में कुछ लोग नाग को अपना कुल देवता मानते थे।सांपों को भगवान शिव का आभूषण कहा जाता है।

नागपंचमी क्यों मनाई जाती है –

  • प्राचीन शास्त्रों में एक मान्यता यह भी है कि आज ही के दिन भगवान विष्णु के शेषनाग ने पृथ्वी का भार अपने सिर पर लिया था इसलिए भी इस दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
  • पुराणों में नागपंचमी की उत्पत्ति कैसे हुई इसका उल्लेख मिलता है।कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन हो रहा था तो नागों को कहा गया था की ये राजा जनमेजय के यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएं किन्तु इन नागों ने माता की आज्ञा का पालन नहीं किया इसलिए उन्हें श्राप मिला था। इससे सभी नाग घबरा गए और ब्रम्हा जी की शरण में चले गए और ब्रम्हा जी से मदद मांगी।
  • तब ब्रम्हा जी ने पंचमी तिथि को नागों की रक्षा का उपाय बताया था। ब्रम्हा जी ने कहा था कि नागवंश में महात्मा जरतकारू के पुत्र आस्तिक होंगे तो वही सभी नागों की रक्षा करेंगे। इसलिए भी नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।
  • आस्तिक मुनि ने सावन में पंचमी तिथि को नागों के ऊपर दूध डालकर उन्हें यज्ञ में जलने से बचाया था। दूध डालने से उन नागों का शरीर शीतल हो गया था और नागों ने आस्तिक मुनि से कहा था कि जो भी उनकी पूजा सावन में पंचमी तिथि को करेगा उसे सर्पदंश का डर नहीं रहेगा। इसलिए सावन की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

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नागपंचमी का महत्व –

  • भारत में हिन्दू धर्म में प्राकृतिक चीज़ों जैसे – भूमि, जल, पेड़ – पौधे और पशुओं आदि को भगवान का रूप मानते हैं और इनकी पूजा करते हैं। हिन्दू धर्म में सांप को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है।
  • प्राचीन समय में सांपों को कुल देवता माना जाता था। नागपंचमी सावन मास की अमावस्या के पांचवें दिन मनाया जाने वाला त्योहार है।नागपंचमी बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है।
  • नागपंचमी का त्योहार भारत के कुछ हिस्सों में आषाढ़ मास की पूर्णिमा के बाद पंचमी को मनाया जाता है। इसे मनसा देवी अष्टांग पूजा भी कहा जाता है।
  • नागपंचमी के दिन सांपों की पूजा करने वाले लोगों को सांप काटने का डर नहीं रहता।एक मान्यता है कि नागपंचमी के दिन नागों को स्नान कराने और उनका पूजन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • नागपंचमी के दिन कई जगह पर लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर नागदेवता का चित्र बनाते हैं इससे घर सुरक्षित रहता है।और उस दिन सांप के काटने का भय नहीं होता।

नागपंचमी की पूजा कैसे करें – 

  • सुबह उठकर रोज के काम करके घर की साफ सफाई करें। उसके बाद नहा लें और साफ कपड़े पहन लें।
  • उसके बाद पूजा में भोग लगाने के लिए या प्रसाद के लिए  खीर या सिवई बनाएं।
  • पूजा के लिए एक जगह निश्चित के लें और वहां की दीवार पर गेरू से पुताई कर दें।पुती हुई दीवार पर दूध और कोयला की मदद से एक घर बनाएं और उस घर में बहुत से नाग देवों की आकृति बना दें।
  • कुछ जगहों पर घरों के मुख्य द्वार के दोनों side हल्दी व चंदन और गोबर की मदद से पांच फन वाले नागदेवता का चित्र बनाया जाता है और पूजा की जाती है।
  • दीवार पर बनाए गए चित्र के सामने सुगंधित फूल, कमल,चंदन, कच्चा दूध,पानी,रोली,और चावल आदि अर्पित करें और खीर तथा सिवई का भोग लगाएं। और उसके बाद आरती करें और कथा सुनें।
  • खीर तथा सिवई को ब्राम्हणों को भी दें और नागों को भी चढ़ा दें।और खुद भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

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नागपंचमी मनाने की पौराणिक कथा –

  • पुराने समय की बात है एक सेठ था उसके सात बेटे थे। सातों पुत्र की शादी हो गई थी। सेठ के छोटे बेटे की पत्नी का कोई भाई नहीं था। वह बहुत ही सरल और सुशील थी।
  • एक दिन सेठ की बड़ी बहू ने सभी बहुओं को साथ में चलकर घर की पुताई करने के लिए मिट्टी लाने को कहा। तो सभी बहुएं डलिया और खुरपी लेकर मिट्टी लाने चली गई।
  • जब वे मिट्टी खोद रही थी तो वहां से एक सांप निकला और बड़ी बहू उस सांप को खुरपी से मारने लगी। तो छोटी बहू ने कहा मत मारिए इसने कोई अपराध नहीं किया है और यह निर्दोष है।
  • तब बड़ी बहू रुक गई उसने सांप को नहीं मारा। और सांप खेत में बैठ गया तभी छोटी बहू ने सांप से कहा कि कहीं जाना मत मैं अभी घर से वापस आती हूं। यह कहकर वह घर चली गई और घर के कामों में व्यस्त हो गई और सांप को भूल गई।
  • दूसरे दिन जब उसे याद आया तो वह सबके साथ जहां मिट्टी खोदने गई थी वहां गई तो देख सांप वहीं बैठा था। छोटी बहू ने सांप से माफी मांगी और कहा सांप भैया मुझसे भूल हो गई।
  • तो सांप ने कहा तुमने मुझे भैया कहा है इसलिए क्षमा कर रहा हूं और सांप ने छोटी बहू को अपनी बहन मान लिया। तब सांप ने छोटी बहू यानि अपनी बहन से कहा जो मांगना है मांग लो।
  • छोटी बहू बोली मेरा कोई भाई नहीं है अच्छा हुआ आप मेरे भाई बन गए आपने मुझे अपनी बहन माना। और मुझे कुछ नहीं चाहिए।
  • फिर कुछ समय बीत गया और एक दिन सांप मानव का रूप लेकर सेठ के घर आया और बोला मेरी बहन को भेज दो मैं उसे लेने आया हूं।
  • यह सुनकर घर के सभी लोग आश्चर्य चकित रह गए और बोले इसका तो कोई भाई नहीं था तब सांप ने घर वालों को विश्वास दिलाया और कहा मैं इसका दूर का भाई हूं बचपन से ही बाहर रहता था।और इस प्रकार सेठ ने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया।
  • जब वे जा रहे थे तो रास्ते में सांप ने अपना असली रूप धारण कर लिया और कहा मैं वही सांप हूं इसलिए डरना मत और उस नाग ने छोटी बहू से कहा तुम मेरे फन पर बैठ जाओ और वह नाग उसे लेकर पाताल लोक चला गया।
  • कुछ दिन बीत गए और उस नाग ने अपनी बहन से जो पृथ्वी लोक से आई है कहा की बहन यहां पर अंधेरा है। इसलिए तुम यहां पर दिया लेकर चला करो क्यूंकि यहां पर छोटे छोटे बच्चे हैं और गलती से कोई बच्चा तुम्हारे पैर के नीचे ना आ जाए।
  • लेकिन उस औरत ने सांप की यह बात नहीं मानी और अंधेरे में चलने लगी। तभी उसके पैर के नीचे एक बच्चा आ गया और उसकी पूछ टूट गई। कुछ दिनों बाद सांप ने कहा अब बहन को उसके घर भेज आना चाहिए और सांप अपनी बहन को लेकर उसके घर छोड़ने चला गया।
  • अगले साल फिर से सावन आया और नागपंचमी का त्योहार आया और उस औरत ने नाग की मूर्ति बनाई और उसे घर के बाहर लगा दिया और अंदर जाकर पूजा अर्चना करने लगी।
  • इसी दौरान कुछ दिनों बाद जब सांप का बच्चा बड़ा हो गया तो उसने अपनी मां से पूछा मां मेरी पूछ कैसे टूटी। तब उसकी मां बोली तुम्हारे पिता की एक बहन थी जो पृथ्वी लोक से आई थी उसने गलती से पैर रख दिया था इसलिए तुम्हारी पूछ  टूट गई।
  • यह सुनकर वह बहुत गुस्से में आ गया। और गुस्से में बोला मैं उसे नहीं छोडूंगा और वह सीधा पृथ्वी लोक उस औरत के घर आ गया और उसने देखा की घर के बाहर उसके पिता नागदेवता की तस्वीर लगी हुई थी और जब घर के अंदर गया तो देखा की वह औरत नागदेवता की पूजा कर रही थी।
  • जब पूजा समाप्त हुई तो उस औरत ने उस बालक को प्रसाद के रूप में खीर खाने को दिया और कहा नाग भैया ये प्रसाद ग्रहण करो। और वह खुश होकर जल्दी जल्दी सारा खीर खा गया।
  • प्रसाद खा कर वह इतना खुश हुआ कि उसने उस औरत से कहा क्यूंकि आप मेरे पिता की बहन हो इसलिए आज से जो भी नागों को भाई के रूप में पूजेगा उसे अकाल मृत्यु और सर्प दोष से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा। इतना कह कर वह अपने घर वापस चले गए। और तब से लेकर आजतक नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

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नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए –

  • नागपंचमी के दिन सांपों को दूध से स्नान करवाना चाहिए।या फिर मन्दिर में जाकर नागदेव की प्रतिमा पर दूध से अभिषेक करना चाहिए।
  • नागपंचमी के दिन बांबी की (सांपों की बिल के पास) पूजा जरूर करना चाहिए।
  • नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा सुगंधित फूल,दूध,खीर, भीगा हुआ बाजरा, घी और चंदन आदि से करना चाहिए। क्यूंकि नागदेवता को सुगन्ध बहुत अच्छी लगती है।
  • नागपंचमी को नागदेव के दर्शन अवश्य करना चाहिए।ऐसा करने से पापों का नास होता है और सांप के काटने का भय नहीं रहता।
  • इस दिन सपेरों और ब्राह्मणों को दान दिया जाता है।
  • नागपंचमी को सपेरों से सांप खरीद कर उसे मुक्त कराया जाता है।
  • नागपंचमी को व्रत रखना चाहिए और ॐ कुरु कुल्ये हुं फट स्वाहा मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से घर में धन धान्य की प्राप्ति होती है और सर्पविष का डर नहीं रहता है। व्रत के बाद सांप को खीर खिलाया जाता है।

 नागपंचमी पर क्या – क्या होता है – 

  • नागपंचमी के दिन कई जगहों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। गावों में और कस्बों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।जैसे – कुश्ती, आखाड़ा और कबड्डी आदि प्रतियोगिताएं होती हैं। इस प्रतियोगिता में आस – पास के सभी पहलवान भाग लेते हैं।
  • नागपंचमी के दिन लोग पशुओं को तालबों और नदियों में नहलाते हैं।
  • नागपंचमी के दिन अष्ट नागों की पूजा की जाती है।
  • नागपंचमी के दिन गावों में झूले पड़ते हैं।और गांव की औरतें रात में झूला झूलते हुए सावन गीत गाती हैं।गावों में नागपंचमी का त्योहार बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
  • नागपंचमी के दिन कई जगहों पर गुड़िया पीटी जाती है।

नागपंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए –

  • नागपंचमी पर सांपों को दूध नहीं पिलाना चाहिए। क्यूंकि दूध पिलाने से सांप की मृत्यु हो जाती है और हत्या का पाप लगता है।
  • नागपंचमी को धरती नहीं खोदना चाहिए। पूरे सावन महीने में जमीन खोदना मना है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सावन में बहुत ज्यादा बरसात के कारण सांप की बिल बन्द हो जाती है इसलिए वे जमीन में कहीं भी रहते है।
  • नागपंचमी के दिन तवा चूल्हे पर नहीं चढ़ाया जाता है।ऐसा माना जाता है कि सांप का फन तवे जैसा होता है इसलिए तवा चढ़ाने का मतलब है कि सांप के फन को जलाना।
  • नागपंचमी को किसान खेतों में हल नहीं चलाते ऐसा करने से उनको भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि सांप हमारे खेतों की रक्षा करते हैं।ये हमारी फसल को नुकसान पहुंचने वाले जीव जंतुओं और चूहों का नाश कर देते हैं। और हमारी फसल की सुरक्षा करते हैं।सांपों को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है।
  • नागपंचमी के दिन लोहे के बरतन में ना तो खाना बनाना चाहिए और नाही खाना चाहिए और इस दिन लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि कहीं कहीं पर लोहे से बने नाग देवता की प्रतिमा की पूजा होती है।
  • इस दिन सुई धागे का प्रयोग नहीं करना चाहिए और नाही सुई में धागा डालना चाहिए।

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जानते हैं कि नागपंचमी को गुड़िया क्यों पीटी जाती है –

  • दोस्तों जैसा की हम सभी जानते हैं कि नागपंचमी का त्योहार हमारे भारत के कुछ राज्यों में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। दोस्तों आपको बता दें कि एक ऐसा  राज्य भी है जहां पर नागपंचमी का त्योहार कुछ अलग तरीके से मनाया जाता। उत्तरप्रदेश में नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परम्परा है। यहां पर गुड़िया पीटने की परम्परा बहुत पुरानी है।
  • उत्तर प्रदेश में घर की औरतें नागपंचमी के दिन पुराने कपड़ों की गुड़िया बना कर चौराहे पर छोड़ देती हैं। और उसके बाद घर के लड़के इन गुड़ियों को डंडे से पीटते हैं। इस अनोखी परम्परा को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं।आइए हम आपको कुछ कहानियों के बारे में बताते हैं।

राजा की बेटी को राजा के दुश्मन के बेटे से प्यार हो गया था –

  • एक कहानी यह है कि राजा की एक बेटी थी जिसका नाम गुड़िया था और उसे एक लड़के से प्रेम हो गया था। वह लड़का राजा के दुश्मन का बेटा था।
  • गुड़िया का यह प्रेम उसके पिता और उसके सात भाइयों को स्वीकार नहीं हुआ। और गुड़िया के भाइयों ने उसे बीच चौराहे पर ले जाकर बांध दिया और लाठी तथा डंडे से खूब पीटा और इस प्रकार गुड़िया की मृत्यु हो गई।
  • गुड़िया के भाइयों ने यह घोषणा की कि समाज में जो भी लड़की ऐसा करेगी उसका यही हाल होगा। तभी से गुड़िया पीटने की परम्परा शुरू हो गई और अभी तक चल ही रही है।

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नागों के दुश्मन गरुण ने नागों पर हमला किया था –

  • जैसा कि आप सभी जानते हैं कि महिलाओं के पेट में बात नहीं पचती। यह कहानी भी इसी बात पर आधारित है एक बार की बात है नागों के दुश्मन गरुण ने एक नाग पर हमला किया था।
  • इस नाग ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए एक औरत से मदद मांगी थी। उस समय औरत ने उस नाग की मदद कर दी थी लेकिन यह बात वह औरत बहुत दिन तक छुपा नहीं पाई और गरुण से नाग के बारे में बता दिया।
  • तब नाग ने क्रोधित होकर उस महिला को श्राप दिया था कि एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हारी पिटाई होगी।
  • इसलिए माना जाता है कि नागदेवता के श्राप के कारण ही नागपंचमी के दिन कपड़ों की गुड़िया बनाकर चौराहे या नदी के किनारे पर रख दिया जाता है और लड़के आकर उसकी पिटाई करते हैं।

भाई – बहन की कहानी से जुड़ी है गुड़िया पीटने की कहानी –

  • यह कहानी कुछ इस तरह है की एक लड़की का भाई था। वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। वह रोज मंदिर जाता है और भगवान शिव की पूजा करता था और उसे रोज नागदेवता के दर्शन होते थे।
  • वह रोज नागदेवता को दूध चढ़ाता था। नागदेवता उससे बहुत प्रसन्न थे। नागदेवता और उस लड़के में बहुत प्रेम हो गया था।
  • नागदेवता को उस लड़के से इतना ज्यादा प्रेम हो गया था कि जब वह लड़का रोज मन्दिर आता था तो उसे देखते ही नागदेवता अपनी मणि उतारकर उसके पैरों में लिपट जाया करते थे।
  • इसी तरह एक दिन ऐसा आया जब सावन का महीना चल रहा था और वे दोनों भाई बहन एक साथ मंदिर गये। मंदिर में पहुंचते ही जब नागदेवता ने उस लड़के को देखा तो वे उसके पैरों में लिपट गए। 
  • जब बहन ने यह देखा कि सांप उसके भाई के पैरों पर लिपटा है तो वह डर गई उसे लगा की सांप उसके भाई को काट रहा है। और उसने अपने भाई की जान बचाने के लिए उस नाग को पीट पीटकर मार डाला।
  • फिर जब भाई ने उस लड़की को पूरी कहानी बताई तो वह रोने लगी। लेकिन हुआ ये कि वहां पर जो लोग उपस्थित थे उन्होंने कहा कि नाग तो देवता का रूप होते हैं इसलिए तुम्हें दण्ड मिलेगा।
  • क्योंकि तुमने अनजाने में गलती की है इसलिए भविष्य में लड़की की जगह कपड़े की गुड़िया बनाकर पीटा जाएगा और इस तरह से नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की परम्परा का आरम्भ हुआ था। 

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Sadhana Kumari

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