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रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? और इसका महत्व क्या है? – Raksha Bandhan 2020

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2020) का महत्व – अगर हम हमारी परम्परा की बात करते है तो हर एक चीज का एक आधार होता है, एक Science, एक समझ और एक मान्यता होती है। उसी मान्यता के आधार पर, उसी समझ के आधार पर हम अलग – अलग पर्व और त्यौहार मनाते है। आखिर रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2020) के पीछे क्या मान्यताएं है। क्या महत्व है आइए जानते है।

  • रक्षा करने और करवाने के लिए जो पवित्र धागा बांधा जाता है। इसको रक्षा सूत्र कहते है। बहन बांधती है अपने भाई को ताकि भाई की रक्षा हो और भाई अपनी बहन को वचन देता है, कि जीवन में जब भी तुम्हे मेरी आवश्यकता पड़ेगी तो मैं तुम्हारी रक्षा करुगा, तो दोनों की रक्षा हो रही है भाई की भी और बहन की भी और ये जिस भाव से बनता है आगे चलके वो भाव होता है रक्षा सूत्र के अंदर। उस भावना के वशभूत हो करके ये रक्षा सूत्र बहने अपने भाई को बांधती है।
  • यह पवित्र पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है, और इस बार यह पर्व 3 अगस्त को मनाया जा रहा है। 3 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है और श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही ये पर्व, ये त्यौहार मनाते है।
  • इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। अपनी भावना के साथ, अपने प्रेम के साथ और अपने व्यवहार के साथ और भाई जो है वो अपनी बहनों को जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।
  • इसके पीछे एक मान्यता है कि राजसूय यज्ञ जब कराया महाराज युधिष्ठिर ने तो भगवान कृष्ण शिशुपाल का वध कर दिए और भगवान श्री कृष्ण के हाथ पर चोट लग गई वध करने के दौरान तो वहां पर को द्रोपदी मौजूद थी उन्होंने अपने आंचल का टुकड़ा भगवान श्री कृष्ण को बांध दिया क्योंकि भगवान श्री कृष्ण की जो मान्यता है, परम्परा है। वो हमारे संस्कारो में सर्वाधिक है।
  • हम श्री कृष्ण के प्रति यह कह सकते है या हम श्री कृष्ण के प्रति सर्वाधिक प्रेम में निमग्न है। इसलिए श्री कृष्ण की तमाम परम्पराओं को बड़ी सहजता से स्वीकार करते हैं। क्योंकि भाई बहन वहां से Inter कर गए। इसलिए वहां से परम्परा शुरू हो गई कि बहनें अपने भाई को राखी बांधेगी।
  • अगर देखा जाए तो प्राचीन काल मे शुरुआती समय में ब्राम्हण अपने यजमानों को राखी बांध करके उनकी मंगल कामना करते थे, क्योंकि रक्षा सूत्र कोई भी बांध सकता है। जो भी आपकी मंगल कामना करता है मंत्रो के साथ, भावना के साथ आपको रक्षा बंधन बांध सकता है।
  • क्या आपको पता है कि सबसे पहले जो राखी थी। वो इंद्राणी जो कि इंद्र की पत्नी थी। उन्होंने इंद्र को बांधी थी।
  • देवासुर संग्राम के समय में, और इंद्र उसको बंधवा कर भी गए थे और विजय भी हुए थे। यानि ऐसा नहीं है कि केवल बहन ही भाई को बांध सकती है।
  • अगर आप अपने मित्र की रक्षा की कामना करते है तो आप मित्र को बांध ले। कोई विद्वान अगर किसी की रक्षा की कामना करता है तो विद्वान बांध सकता है।
  • पत्नी अपने पति की रक्षा की कामना करती है तो पत्नी भी बांध सकती है। इसमें भगवान श्री कृष्ण जी की कहानी भी जुड़ी हुई है। क्योकि इसमें बहन भाई वाला Factor आ गया इसलिए यह पर्व बहन भाई तक ही सीमित करके रह गया।
  • जबकि इस पर्व को अगर हम देखे, अगर हम समझे तो यह पर्व रक्षा की कामना का पर्व है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन एक और खास बात है। हमारी परम्परा जो शुरु होती है वह दरअसल वेदों से शुरु होती है। जो पुराण है, वे वेदों को सरल भाषा में कहानियों के रूप में बताने के लिए बाद में आएं जो वेद है और वेद का जो पाठ होता है। उसमे चार वेद होते है।
  • यजुर्वेद 
  • सामवेद 
  • अथर्ववेद
  • ऋग्वेद

इसमें से जो यजुर्वेद का पाठ करते हैं, जो ब्राम्हण उसका पाठ आरंभ करते है श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यानि की रक्षा बंधन के दिन से यजुर्वेद का पाठ आरंभ किया जाता है। इसलिए यह बात भी जानिए कि अगर आप अपने बच्चो की या स्वयं की शिक्षा का आरंभ करना चाहते है तो उसके लिए भी श्रावण शुक्ल पक्ष की जो पूर्णिमा है। रक्षाबंधन का जो मौका होता है वो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

(Raksha Bandhan 2020)

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क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन?

  • राखी का इतिहास हमारे महाभारत से मिलता है। भगवान श्री कृष्ण को सूत देवी नाम की एक चाची थी। उन्हें नव शिशुपाल नामक एक विकृत बच्चे को जन्म दिया था।
  • बड़ो से यह पता चलता है कि जिसके स्पर्श से शिशुपाल ठीक होगा। उसी के हाथो से शिशुपाल की मृत्यु भी होगी।
  • एक दिन श्री कृष्ण अपने चाची के घर मिलने आए थे और जैसे ही सूत देवी ने अपने बच्चे को श्री कृष्ण के हाथ में दिया। वह एकदम सुंदर हो गया। तभी सूत देवी अपने बालक को देखकर बहुत खुश हो गई। पर उसकी मृत्यु श्री कृष्ण के हाथों से होने से वह विचलित हो गई।
  • वह भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करने लगी। भले ही शिशुपाल कितनी भी गलती करे पर उसे भगवान श्री कृष्ण के हाथों से सजा नहीं मिलनी चाहिए।
  • भगवान श्री कृष्ण ने अपनी चाची से वादा किया कि मैं उसकी गलती माफ कर दूंगा, परन्तु उसने अगर 100 गलती से अधिक बार गलती करी तो मैं उसकी गलती माफ नहीं करूंगा।
  • शिशुपाल बड़ा होकर चिड़ी नामक राज्य का राजा भी बन गया और वह बहुत क्रूर था और भगवान श्री कृष्ण का रिश्तेदार भी, शिशुपाल अपनी क्रूरता के चलते अपने राज्य को भी परेशान करता था और बार-बार भगवान श्री कृष्ण का भी अपमान करता था, परन्तु एक बार हद ही हो गई।
  • जब शिशुपाल ने भगवान श्री कृष्ण का भरी सभा में अपमान कर दिया और बहुत निंदा की परंतु उसने इस बार 100 गलतियों का आंकड़ा भी पार कर लिया था, तुरंत भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन  चक्र से शिशुपाल के ऊपर प्रहार कर दिया।
  • भगवान श्री कृष्ण की अनेक चुनौतियों के बाद भी शिशुपाल ने अपने गुण नहीं बदले। जिसके कारण उसे अंत में अपने प्राण गवाने पड़े।
  • भगवान श्री कृष्ण जब क्रोध में शिशुपाल के ऊपर सुदर्शन चक्र छोड़ रहे थे तो उनकी उंगली में भी लग गई थी। जिसमे खून बहने लगा था।
  • इस दृश्य को देखकर वहां पर खड़े सभी लोग भगवान श्री कृष्ण के उंगली पर बांधने के लिए इधर-उधर भागने लगे परंतु वहां पर खड़ी द्रौपदी ने बिना कुछ सोचे समझे, बिना समय गवाएं अपने साड़ी के पल्लू को फाड़ कर भगवान श्री कृष्ण के उंगलियों पर बांधने लगी जिससे भगवान श्री कृष्ण के उंगलियों से बहता हुआ खून रुक गया, तो भगवान श्री कृष्ण कहते हैं शुक्रिया मेरी प्यारी बहना तुमने मेरे दुख में साथ दिया है तो मैं भी तुम्हारे दुख में काम आऊंगा।
  • यह कह कर भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को उनकी रक्षा करने का आश्वासन दिया था, और इस घटना से रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2020) पर्व का प्रारंभ हुआ था और जब कौरवों ने भरी राज्यसभा में द्रोपदी की साड़ी खींचकर उनका अपमान करने का प्रयास किया था तो भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को बचाकर अपना वादा पूरा किया था और द्वापर युग से बहने आज तक अपने भाइयों के कलाई पर रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2020) के पर्व पर राखी बांधती है और बदले में भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का आश्वासन देते आ रहे हैं।

(Raksha Bandhan 2020)

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कैसे मनाएं रक्षाबंधन इस बार –

  • सबसे पहले बहनों को एक थाल सजानी चाहिए। थाल में रोली, चंदन, अक्षत, दही रक्षासूत्र और मिठाई रखनी चाहिए। घी का एक दीपक भी रखना चाहिए। एक मुखी दीपक घी का जला करके थाल मे रखना चाहिए। इससे आपको अपने भाई की आरती करनी है।
  • रक्षासूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करनी चाहिए। इसके बाद अपने भाई को बैठाए पूरब की तरफ या उत्तर की तरफ यानि East Side के तरफ Face करके या North Side के तरफ Face करके अपने भाई को बैठाए।
  • पहले अपने भाई को तिलक लगाएं। इसके बाद भाई को रक्षासूत्र बांधे इसके बाद अपने भाई की आरती करें। फिर मिठाई खिला करके अपने भाई की मंगल कामना करें।
  • भाई को आशीर्वाद दे, प्रार्थना करें कि भाई के जीवन में सब कुछ शुभ हो, भाई की रक्षा हो।
  • रक्षासूत्र जब आप अपने भाई को बांधेगी तो भाई का सिर भी ढाका हुआ हो और बहने भी अपना सर आंचल या दुपट्टा से ढक लें यानि भाई बहन का सर जो है वो खुला हुआ नहीं होना चाहिए।
  • रक्षा बंधवाने के बाद माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लेना चाहिए। भाई जब रक्षासूत्र अपने हाथ में बंधवा ले तो उसके बाद अपने माता-पिता को प्रणाम करे उनका आशीर्वाद लें।
  • अपने गुरु का आशीर्वाद लें और इसके बाद जितना भी सामर्थ है, जितना Capacity है भाई की उसके हिसाब से अपने बहन को उपहार दें। उपहार में ऐसी चीजे देनी चाहिए जो दोनों के लिए मंगलकारी हो, दोनों के लिए शुभ हो। काले वस्त्र, तीखा या नमकीन खाद्य पदार्थ नहीं देना चाहिए।

(Raksha Bandhan 2020)

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रक्षासूत्र कैसा होना चाहिए?

  • आजकल बाजार में अनेक तरह की Designer राखियां है, Fashion वाली राखियां है। जिसमें Cartoon Character बने हुए हैं ऐसी राखियां है जिसमें लाइट निकलती है। अलग-अलग तरह की राखियां अजब – गजब तरह की राखियां बाजार में मौजूद होती है तो बहन जब अपने भाई के लिए रक्षासूत्र खरीदे तो किन बातों का ध्यान रखें।
  • वास्तव में रक्षासूत्र जो है वो तीन धागों का होना चाहिए। लाल धागा, पीला धागा और सफेद धागा।
  • लाल धागा होता है ब्रम्हा का, पीला धागा विष्णु जी का और सफेद धागा शिव जी का इसलिए इन तीनों धागों को मिला करके त्री शक्तियों का प्रतीक मानते हैं।
  • अगर सफेद धागे वाला रक्षा नहीं मिल रहा है तो लाल और पीला धागा का होना जरूरी है। लाल और पीले धागे से बना हुआ रक्षासूत्र सबसे ज्यादा उत्तम हो।
  • अगर रक्षासूत्र में चन्दन लगा हुआ हो, चंदन की लकड़ी लगी हुई हो या फिर चंदन का टुकड़ा लगा हुआ हो तो ऐसा रक्षासूत्र बहुत शुभ होता है, बहुत मंगलकारी होता है और अगर आपको ऐसा रक्षासूत्र नहीं मिल पा रहा है।
  • सब जगह Designer राखियां ही मिल रही है तो कुछ न होने पर कलावा भी श्रद्धा पूर्वक बांध सकती है। बहन जो है, जो Normal कलावा आता है पीले और लाल रंग वाला इसको हम अक्सर पूजा पाढ़ में, हवन आदि मे बांधते है वो कलावा भी साधारण तरीके से प्रेम के साथ भाई की मंगल कामना के साथ भाई को बांध सकती है।

(Raksha Bandhan 2020)

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Alka Garg

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