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भाई – बहन का पवित्र त्योहार रक्षा बन्धन – Raksha Bandhan

Hello friends, आज हम बात करने वाले है रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के बारें में। जैसा की आप सभी जानते ही हैं कि हमारे भारत देश को त्योहारों का देश कहा जाता है। हमारे भारत देश में आए दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है चाहे वह राष्ट्रीय त्योहार हो या धार्मिक त्योहार। सभी तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। दोस्तों  इन्हीं त्योहारों में से एक त्योहार है रक्षा बन्धन (Raksha Bandhan)। जिसके बारे में आज हम बात करेंगे। यह त्योहार पूरे भारत वर्ष में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षा बन्धन (Raksha Bandhan) भाई बहन का त्योहार है। यह त्योहार भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है और भाई बहन के अटूट प्रेम की निशानी है। रक्षा बन्धन मुख्यता हिन्दुओं का त्योहार है लेकिन अब इस त्योहार को सिख, जैन आदि कई धर्मों में मनाया जाता है।

भाई बहन में विश्वास को बनाए रखने वाला ये त्योहार वर्षों से मनाया जा रहा है।आइए जानते हैं पुराने समय से मनाए जाने वाले इस त्योहार के पीछे क्या कारण है।आज हम इस त्योहार के मनाए जाने की ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं के बारे में जानेंगे और इस त्योहार के बारे में विस्तार से जानेंगे। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) को राखी के नाम से भी जाना जाता है।

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Table of Contents

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) क्या है?

  • रक्षा बंधन बहन के स्नेह और कर्तव्यनिष्ठा का त्योहार है। यह त्योहार भाई और बहन को स्नेह की डोर से बांधता है।
  • रक्षा बंधन दो शब्दों से मिलकर बना है।रक्षा और बन्धन। रक्षा का अर्थ होता है रक्षा प्रदान करना और बन्धन का अर्थ होता है एक डोर एक गांठ जो रक्षा प्रदान करती है। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का वास्तविक अर्थ है कि एक ऐसी डोर जो भाई और बहन को रक्षा प्रदान करती है। 
  • यह त्योहार खून के रिश्ते पर Depend नहीं करता बल्कि यह त्योहार एक भाई और बहन के आपसी प्रेम को और एक परिवार को जोड़ कर रखता है। यह त्योहार भाई बहन के प्रेम और पवित्र रिश्ते का प्रतीक है।
  • यह त्योहार भाइयों को याद दिलाता है कि बहन के प्रति भी उनका एक कर्तव्य है। कि यदि बहनों पर कोई विपत्ति या समस्या आती है तो वह उनकी रक्षा करें। इस दिन बहनें भी भगवान से अपने भाइयों की लम्बी उम्र और तरक्की की कामना करती हैं।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) कब मनाया जाता है?

रक्षा बंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भाई बहन के रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मनाया जाता है।

  • रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार हिंदी पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
  • इस दिन बहनें अपने भाइयों के दाहिने हाथ की कलाई में एक रक्षा सूत्र बांधती है जिसे राखी कहते हैं। और माथे पर एक टीका लगती हैं। इसके बदले में वे अपने भाई से कोई भी विपत्ति या समस्या आने पर जीवनभर रक्षा करने का वादा लेती हैं।
  • बहनें भी ईश्वर से अपने भाई की तरक्की ओर लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी रक्षा बंधन के दिन अपनी बहन को राखी के बदले में उपहार देते हैं।
  • राखी कई तरह की जैसे – कच्चे सूत, रेशमी धागे और रंगीन कलावे आदि की हो सकती है।आजकल तो बाजारों में सोने और चांदी की राखी भी मिलने लगी है। जिसे बहनें अपने भाइयों को बांधती हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि श्रावण मास में राखी बांधने से अमरता, निडरता, कीर्ति, उत्साह और स्फूर्ति प्रदान होती है।

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रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का महत्व –

  •  रक्षा बन्धन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्रेम और स्नेह को आपस में जोड़ने के साथ – साथ सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखता है। राखी बांधने की परम्परा भारत में बहुत पहले से प्रचलित है।
  • रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार श्रावण मास  में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वैसे तो हर पूर्णिमा किसी न किसी उत्सव को समर्पित है लेकिन श्रावण मास की पूर्णिमा का अपना अलग की महत्व है। ऐसा माना जाता है कि आज ही के दिन यज्ञोपवीत बदला जाता है।
  • इस दिन बहने अपने भाइयों के घर जाती हैं। और उनको राखी बांधती हैं और भाई को वचन देती हैं कि मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी और इसके बदले में भाई से वचन लेती हैं कि तुम भी कोई संकट आने पर मेरी रक्षा करना। और यह जरूरी नहीं कि वे उनके सगे भाई ही हों वह किसी को भी रक्षा सूत्र बांध कर बहन का फर्ज और रिश्ता निभाती हैं।
  • रक्षा बंधन का त्योहार भाई और बहन की संवेदनाओं और भावनाओं का प्रतीक है।रक्षा बंधन का मतलब एक ऐसा बन्धन जो दो लोगों को प्रेम और स्नेह से बांध दे।
  • रक्षा बंधन का त्योहार सिर्फ भाई बहन तक ही सीमित नहीं है। पुराने समय में रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के दिन भाई बहन के अलावा पुरोहित अपने यजमान को और यजमान अपने पुरोहित को राखी बांधते थे।और एक दूसरे के कल्याण और उन्नति की कामना करते थे।
  • यह त्योहार देश की रक्षा के लिए, पर्यावरण की रक्षा के लिए, धर्म की रक्षा के लिए भी मनाया जाता है। राखी को ब्राह्मणों, गुरुओं, सेना के जवानों को, पिता आदि को छोटी लड़कियों द्वारा पहनाई जाती है।
  • ऐसा माना जाता है कि श्रावण मास की पूर्णिमा को राखी बांधने से बुरे ग्रह कटते हैं। रक्षा बंधन को कई नामों से जाना जाता है जैसे – विष तारक (विष को नष्ट करने वाला) और पुण्य प्रदायक (पुण्य प्रदान करने वाला)।
  • रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के इस महत्वपूर्ण त्योहार के दिन सभी भाइयों और बहनों तथा समाज के सभी लोगों को प्रेम,कर्तव्य और संकल्प का पालन करते हुए और रक्षा का दायित्व लेते हुए ढेर सारी खुशियों और शुभकामनाओं के साथ इस त्योहार को मनाना चाहिए।

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रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) क्यों मनाया जाता है?

  • दोस्तों आप सबके मन में यह सवाल तो आता ही होगा कि रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है।यह त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्यूंकि यह त्योहार एक भाई और बहन के प्रति कर्तव्य और प्रेम को प्रस्तुत करता है।
  • जरूरी नहीं हैं कि इस त्योहार को सिर्फ सगे भाई बहन ही मना सकते हैं।इस त्योहार को कोई भी महिला और पुरुष मना सकते हैं। बस वह इस त्योहार की मर्यादा और इसके महत्व को समझते हों।
  • पुराने समय में वृक्षों की रक्षा के लिए भी उन्हें राखी बांधने की परम्परा थी। पहले समय में  बहनें भाई को रक्षा सूत्र बांधने से पहले नीम या तुलसी के पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधती थी।जिसे वृक्ष रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) कहते थे।
  • रक्षा बंधन मनाए जाने की ऐसी ही कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं जिनके बारे में हम नीचे विस्तार से जानेंगे।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) मनाए जाने की ऐतिहासिक कहानियां –

रक्षा बंधन का त्योहार पूरे भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है रक्षा बंधन का त्योहार कब से शुरू हुआ इस बारे में कोई निश्चित जानकारी तो नहीं है लेकिन रक्षा बंधन के विषय में कई ऐतिहासिक कहनियां प्रचलित हैं।आइए जानते हैं रक्षा बन्धन मनाए जाने की ऐतिहासिक कथाएं – 

  1. युद्ध की कहानी – रक्षा बंधन का इतिहास युद्ध की  कहानी से भी जुड़ा है जब पुराने समय में राजपूत और सैनिक लोग युद्ध करने जाते थे तो उनकी पत्नियां उनके माथे पर कुमकुम का टीका लगाती थी और हाथ में एक रक्षा सूत्र (रेशम का धागा) बांधती थी। वे यह धागा इस विश्वास के साथ बांधती थी कि युद्ध के समय उनके पतियों को कोई हानि नहीं होगी और वे युद्ध में विजयी होकर वापस लौटेंगे।
  1. महारानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी – रक्षा बंधन पर रानी कर्णावती और हुमायूं की कथा बहुत प्रचलित है।कहा जाता है जब मध्य कालीन युग में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच संघर्ष हो रहा था। तब बहादुर शाह द्वारा मेवाड़  पर आक्रमण करने की सूचना रानी कर्णावती को पहले ही मिल गई थी।रानी कर्णावती मेवाड़ के राजा महाराणा सांगा की विधवा पत्नी थी। वे अपनी प्रजा की रक्षा करने में असमर्थ थी तब उन्होंने प्रजा की रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी थी और मेवाड़ की रक्षा का वचन मांगा था। राखी हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है लेकिन हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी रानी कर्णावती की राखी को स्वीकार किया और सम्मान दिया और भाई का धर्म निभाते हुए बहादुर शाह से युद्ध किया। और उनके राज्य की रक्षा की।हुमायूं ने भाई के धर्म का पालन करते हुए चित्तौड़ पर कभी आक्रमण भी नहीं किया।
  1. सम्राट सिकंदर और सम्राट पुरू की कहानी – एक कथा यह भी है कि सम्राट सिकंदर की पत्नी ने हिन्दू शत्रु सम्राट पुरू को राखी बांधकर अपने पति के जीवन की रक्षा का वचन मांगा था। और सम्राट पुरू ने अपनी बहन के इस वचन का पालन किया था।कहा जाता एक बार जब सिकंदर ने पोरस पर हमला किया था तो सम्राट पुरू ने अपने हाथ में बंधी हुई राखी और बहन को दिए हुए वचन का पालन करते हुए सिकंदर को जीवन दान दिया था।उन्होंने सिकंदर से युद्ध नहीं किया।
  1. युधिष्ठिर की कहानी – महाभारत में भी राखी के इस त्योहार का प्रसंग मिलता है। कहा जाता है एक बार युद्ध के दौरान पांडव युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से पूछा था कि मैं इन सभी संकटों को कैसे दूर करूं तब श्री कृष्ण ने कहा था कि अपनी और अपनी सेना की रक्षा के लिए हाथों में एक रक्षा सूत्र बांधो।और इसे एक त्योहार के रूप में मनाओ। उनका कहना था कि इस रक्षा सूत्र में वह शक्ति है जिससे सभी संकटों को दूर किया जा सकता और मुक्ति मिल सकती है।तब माता कुंती ने अभिमन्यु के हाथ में एक रक्षा सूत्र बांधा था।तभी से राखी मनाने की परम्परा का जन्म हुआ।

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रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) मनाए जाने की पौराणिक कहानियां –

इस त्योहार की शुरुआत सगे भाई – बहनों से नहीं हुई थी रक्षा बन्धन की शुरुआत कब हुई इसका कोई  स्पष्ट प्रमाण नहीं है फिर भी यह माना जाता है कि इसकी शुरुआत छह हजार साल पूर्व हुई थी इस त्योहार की शुरुआत बहन रूपी महिलाओं की सुरक्षा के वचन के साथ हुई थी। राखी के त्योहार से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। जिसके बारे में हम आपको बताएंगे-

देवराज इन्द्र की कहानी –

सबसे पहली पौराणिक कथा यह है कि जब धरती की रक्षा के लिए देवों और दानवों में युद्ध हो रहा था। तब दानवों को हावी होते देख देवराज इन्द्र घबरा गए और वे बृहस्पति के पास गए।और उनसे सारी बातें बताई। जब वे बृहस्पति से बातें बता रहे थे। तब उनकी सारी बातें वहां पर बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी ने सुन ली।और उन्होंने अपने पति की लड़ाई में रक्षा के लिए मंत्रों की शक्ति से युक्त एक पवित्र रेशम का धागा हाथों में बांध दिया।कहा जाता है कि वह दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था।लोगों का विश्वास है कि उस धागे की मंत्रों शक्ति से इन्द्र देव लड़ाई में जीत गए। और तभी से श्रावण पूर्णिमा के दिन धागा बांधने की परम्परा चली आ रही है।ऐसा माना जाता है कि यह पहली पौराणिक कथा है।

श्री कृष्ण और द्रोपदी की कहानी –

महाभारत में भी रक्षा बन्धन से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है जब शिशुपाल राज्यसभा में द्रोपदी और पांडवों का अपमान कर रहे थे। (ऐसा लिखा है कि श्री कृष्ण ने शिशुपाल के सौ अपराध माफ करने का वचन दिया था। कृष्ण ने शिशुपाल सौ अपराध माफ कर दिए थे।उसके बाद जैसे ही शिशुपाल ने एक सौ एक अपराध किया था)।तब कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया था।तब उनकी तर्जनी उंगली में चोट लग जाने से खून निकलने लगा था।तो उस समय द्रोपदी ने अपनी साड़ी के आंचल का एक टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण की उंगली में बांध दिया था और कृष्ण ने इस उपकार के बदले में  संकट के समय द्रोपदी की रक्षा करने का वचन दिया था। संयोगवश वह दिन भी श्रावण पूर्णिमा का था।

यही कारण था जब कुरुवों की राज्य सभा में दयूत सभा हो रही थी तो पांडव द्रोपदी को हार गए थे तब दुहसासन द्वारा द्रोपदी का चीर हरण करने पर कृष्ण ने उसी उपकार के बदले में द्रोपदी की साड़ी बढ़ाकर द्रोपदी की लाज बचाई थी।यहां से भी रक्षा बन्धन के त्योहार का प्रारम्भ हुआ था।कहा जाता है कि रक्षा बन्धन परस्पर एक दूसरे के आपसी सहयोग और रक्षा की भावना का त्योहार है।

वामन अवतार की कहानी –

रक्षा बन्धन की कहानी का एक प्रसंग भगवदपुराण,स्कन्द पुराण और पद्मपुराण में भी मिलता है। इस कथा के अनुसार यह कहा जाता है कि जब दानवेद्र राजा बलि ने 100 यज्ञ पूरे कर लिए थे। तो वे स्वर्ग पर राज्य करना चाहते थे।यह देखकर सभी देवतागण भयभीत हो गए और देवराज इन्द्र और कुछ देवता भगवान विष्णु के पास गए।भगवान विष्णु से प्रार्थना की और सभी बातें बताई। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और ब्राह्मण के भेष में राजा बलि के पास गए और उन्होंने राजा बलि से 3 पग भूमि दान में मांग ली। क्योंकि राजा बलि बहुत बड़े दानवीर थे इसलिए उन्होंने भगवान विष्णु को 3 पग भूमि दान में दे दी और इस प्रकार भगवान विष्णु ने 3 पग भूमि में पूरा आकाश, पाताल और धरती नाप ली और राजा बलि के अभिमान को तोड़कर उसे रसातल में भेज दिया। 

कहा जाता है रसातल में जाने के बाद राजा बलि ने अपनी भक्ति के दम पर भगवान विष्णु से एक वचन मांगा उस वचन में उसने भगवान विष्णु को दिन – रात अपने पास रहने के लिए कहा।इस प्रकार माता लक्ष्मी ने अपने पति भगवान विष्णु के घर वापस ना लौटने पर परेशान ही गई और नारद से इसका उपाय मांगा। तब नारद मुनि ने माता लक्ष्मी से कहा की आप राजा बलि को राखी बांध कर अपना भाई बना लो।और माता लक्ष्मी ने राजा  बलि को राखी बांधकर अपना भाई बना लिया और इसके बदले में उन्होंने राजा बलि से अपने पति को घर वापस ले जाने का वचन मांगा।वह दिन भी श्रावण पूर्णिमा का ही दिन था। और इस प्रकार माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को घर वापस ले आयी।तभी से रक्षा बन्धन पर्व मनाया जाने लगा। इसी कहानी के कारण रक्षा बन्धन को बलेव भी कहा जाता है।

माता संतोषी की कहानी –

रक्षा बन्धन की कहानी माता संतोषी से भी जुड़ी हुई है।कहा जाता है एक बार भगवान गणेश के दोनों पुत्र शुभ और लाभ एक बात को लेकर जिद करने लगे की मेरी कोई बहन नहीं है।और इस बात को लेकर वे बहुत परेशान थे।तब नारद जी ने भगवान गणेश से अपनी शक्ति द्वारा उन पुत्रों के लिए बहन उत्पन्न करने की बात कही।

तब गणेश जी नारद की इस याचना के कारण अपनी शक्ति से संतोषी माता को उत्पन्न किया।वह दिन भी श्रावण पूर्णिमा का दिन था। तभी संतोषी माता ने अपने दोनो भाइयों के हाथों में राखी बांधी थी।और अपने भाइयों की रक्षा की कामना भी की थी। अतः तभी से रक्षा बन्धन का  त्योहार मनाने की प्रथा चली आ रही है।

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से भी जुड़ा है रक्षा बन्धन का त्योहार –

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी रक्षा बंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनजागरण के हित के लिए भी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में इस त्योहार का सहारा लिया गया था।और बंगाल निवासियों के आपसी भाईचारे और एकता के लिए श्री रवींद्रनाथ ठाकुर ने बंगभंग का विरोध किया था। उन्होंने तभी  लोगों में आपसी भाईचारे और प्रेम के लिए इस त्योहार को शुरू किया।

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रक्षा सूत्र (राखी) बांधने की विधि –

  •  सबसे पहले सुबह उठकर सभी कामों को करके घर की साफ – सफाई कर लें। और पूरे घर में गंगा जल से छिड़काव कर दें।
  • उसके बाद  भाई और बहन नहा कर नए कपड़े पहन लें और भगवान सूर्य देव को जल चढ़ाकर घर के मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना करें।
  • उसके बाद राखी की थाली तैयार करें या सजाएं। चांदी, पीतल या फिर कोई और साफ थाली  लें और उस थाली में एक साफ कपड़ा बीछा दें।
  • थाली में जल का कलश, नारियल,सुपारी, मौली, कुमकुम,चन्दन, अक्षत, दही, राखी, उपहार,दीपक और मिठाई रखें।
  • सबसे पहले थाली में दीपक जलाकर सजी हुई थाली को  भगवान को समर्पित करें।और भाई को राखी बांधने से पहले अपने भगवान कान्हा,श्री गणेश और शिव जी को राखी बांधे।
  • एक राखी नागदेवता और भैरव जी के नाम की भी बांधे।
  • उसके बाद शुभ मुहूर्त होने पर भाई को बुलाकर  एक साफ स्थान पर नीचे लकड़ी के पीढ़े पर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके बिठाएं।
  • उसके बाद राखी बांधने की विधि शुरु करें सबसे पहले बहन भाई के माथे पर कुमकुम या चन्दन का टीका लगाती है।और चावल को टीके के ऊपर लगा दें फिर भाई की आरती करते हैं और अक्षत फेंकते हैं। 
  • उसके बाद भाई के दाहिने हाथ की कलाई में राखी बांधते हुए मंत्र का उच्चारण करें ।

ॐ येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।

तेन त्वामपि बंधनामी रक्षे मा चल मा चल।।

  •  इस मंत्र का अर्थ है जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था उसी सूत्र से मैं तुम्हे बांधती हूं। हे रक्षे! तुम अडिग रहना। तुम अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना। शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र का जाप करने या उच्चारण करने से भाई की उम्र में वृद्धि होती है।
  • राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और भाई अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें।
  •  उपहार में वे बहन को कपड़ा, आभूषण और अन्य चीजें देते हैं। और बहन इस उपहार को खुशी – खुशी स्वीकार करती है।
  • सबकुछ होने के बाद भाई अपनी बहन के पैर छूते हैं चाहे बहन बड़ी हो या छोटी।और अपने बड़ों माता – पिता का आशीर्वाद लेते हैं।
  • सब कुछ खत्म हो जाने के बाद पूजा की थाली को कुछ समय के लिए पूजा स्थान पर रख दें और दीपक को जलने दें उसे बुझाएं नहीं।

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ध्यान रखने योग्य कुछ बातें –

  • राखी बांधते समय ध्यान रखें कि भाई और बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए। सर पर कोई रुमाल या फिर कोई कपड़ा रख लें।
  • ध्यान रखें उपहार में कोई ऐसी चीज़ जैसे नमकीन या काला कपड़ा ना दें।
  • रक्षा बंधन पर चंदन जरूर लगाएं। यह बहुत शुभ माना जाता है।
  • राखी बांधने से पहले कलावा जरूर बांधे।
  • भाई को टीका लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम की तरफ होना चाहिए।
  • आज के आधुनिक युग में लोग कुर्सी पर या सोफे पर बैठ कर राखी बंधवाते है। यह सही नहीं है। राखी बंधवाते समय लकड़ी के पीढ़े पर ही बैठें। इससे शुद्धिकरण होता है और अच्छा प्रभाव पड़ता है।पीढ़े पर भाई बहन दोनों को बैठना चाहिए।
  • रक्षा बंधन पर भद्रकाल नहीं होना चाहिए किसी शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधें।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) पर क्या क्या पकवान बनते हैं –

सभी त्योहारों की तरह रक्षा बंधन पर भी कुछ विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं।

  • रक्षा बंधन पर घेवर, शक्कर पारे, नमक पारे और घुघनी बनाई जाती है। घेवर सावन की विशेष मिठाई है इसे केवल हलवाई ही बनाते हैं। जबकि शक्कर पारा और नमकपारा घर पर ही बनाया जाता है।
  • घुघनी बनाने के लिए काले चने को रात में भिगो दिया जाता है और सुबह उसे उबाल लिया जाता है और छौंक लगा कर इसे चटपटा  बनाया जाता है।इसे पूरी और दही के साथ भी खाते हैं।
  • हलवा और खीर भी इस त्योहार के प्रमुख पकवान हैं।

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रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) पर भाई के लिए राखी कैसे खरीदें –

दोस्तों आइए जानते हैं कि हम अपने भाई के लिए किस प्रकार की राखी खरीदें। कौन सा रंग भाई के लिए शुभ होता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग राशि होती है और हर राशि का एक शुभ रंग होता है। अतः इसी प्रकार यदि हम अपने भाई की राशि के अनुसार  शुभ रंग की राखी  खरीदें और बांधे।तो यह राखी उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियां लाती हैं। आइए जानते हैं कि भाई की राशि के अनुसार किस रंग की राखी खरीदें –

  1. मेष राशि – मेष राशि के लिए लाल, नारंगी और सुहनरा रंग शुभ माना जाता है। अतः इस रंग की राखी अपने भाई के लिए खरीदें।
  1. वृषभ राशि – इस राशि के लिए सिल्वर कलर, नीला और बादामी रंग शुभ होता है। अतः इस राशि के भाई के लिए इन रंगों की राखी खरीदें।
  1. मिथुन राशि – मिथुन राशि के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है। इस राशि के भाई के लिए हरे रंग या हरे रंग के शेड्स वाली राखी खरीदें।
  1. कर्क राशि – कर्क राशि के लिए हल्का बादामी रंग और मोती शुभ मानी जाती है।इस राशि के भाई के लिए इस रंग की राखी और मोतियों वाली राखी खरीदें।
  1. सिंह राशि – सिंह राशि के लिए पीला रंग और नारंगी रंग शुभ और फल देने वाला होता है। अतः इस राशि के भाई के लिए इन रंगों की राखी खरीदें।
  1. कन्या राशि – कन्या राशि के लिए हरा रंग और रामा हरा रंग शुभ और फल दायक होता है।इस राशि के लोगों के लिए हरे रंग और रामा हरे रंग की राखी खरीदें।
  1. तुला राशि – तुला राशि के लोगों के लिए multi color की राखी खरीदें।यह एक वैभवशाली राशि होती है। अतः इस राशि के लोगों के लिए multi color बहुत शुभ होता है।
  1. वृश्चिक राशि – इस राशि के लिए मैजेंटा, गुलाबी और संतरी रंग अच्छा मना जाता है। अतः इस राशि के जातक के लिए इन रंगों की राखी खरीदें।
  1. धनु राशि – धनु राशि के लिए पीला और हल्दी रंग शुभ और अच्छा माना जाता है। इस राशि के लोगों के लिए इन रंगों  की राखी खरीदें।
  1. मकर राशि – परपल कलर, गहरा गुलाबी रंग और गहरा नीला रंग इस राशि के लिए शुभ होता है।इस राशि के लोगों के लिए इन रंगों की राखी खरीदें।
  1. कुंभ राशि – कुंभ राशि के लिए आसमानी और नीला रंग शुभ होता है। अतः कुंभ राशि के लिए यह रंग की राखी खरीदें।
  1. मीन राशि – मीन राशि के लिए केसरिया, पीला और लाल रंग अच्छा होता है।इस राशि के लोगों के लिए इन रंगों की राखी खरीदें।

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आइए देखते हैं भारत के कुछ राज्यों और दूसरे प्रांतों में राखी कैसे मनाई जाती है –

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत एक विशाल देश है।इसलिए भारत में हर त्योहार हर राज्य में अलग – अलग तरीके से मनाया जाता है।आइए जानते हैं कि अन्य प्रांतों में और कुछ राज्यों में रक्षा बन्धन कैसे मनाया जाता है –

  • महाराष्ट्र में – महाराष्ट्र में रक्षा बन्धन के इस त्योहार को श्रावणी और नारियल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में इस त्योहार के दिन लोग समुद्र की पूजा करते हैं और समुद्र के तट या नदी में जाकर स्नान करते हैं और अपने जनेयू को भी बदलते हैं।।इस दिन समुद्र के देवता वरुण की पूजा करते हैैं और उन्हें नारियल चढ़ाया जाता है।मुंबई में रक्षा बन्धन के दिन समुद्र तट नारियल के फलों से भरा रहता है।
  • राजस्थान में – राजस्थान में यह त्योहार कुछ अलग तरीके से मनाया जाता है।जोधपुर में राखी के दिन दोपहर में पदमसर और मिनकानाडी पर गोबर,मिट्टी और भस्मी से स्नान करके शरीर को शुद्ध किया जाता है।उसके बाद धर्म तथा वेदों के प्रवचनकर्ताओं से अरुंधति,गणपति,दुर्गा,गोभिला और सप्तऋषियों का पूजा स्थल बनाकर पूजा की जाती है और मंत्रों का जाप करते हैं। उसके बाद घर पर आकर हवन किया जाता है।उसके बाद रेशमी धागे से राखी बनाई जाती है और राखी को कच्चे दूध में भिगोया जाता है और फिर राखी बांधी जाती है।

राजस्थान में रक्षा बन्धन पर रामराखी, चूड़ा राखी और लूंबा बांधने की परम्परा है। रामराखी भगवान को बांधी जाती है और चूड़ा राखी भाभियों को बांधी जाती है 

  • उत्तरांचल में – उत्तरांचल में राखी के त्योहार को श्रावणी कहा जाता है। उत्तरांचल में इस त्योहार को ब्राह्मणों का प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन ब्राह्मण यजमानों को यज्ञोपवीत और राखी देते हैं तथा उसके बदले में दक्षिणा लेते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में – उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को रक्षा बन्धन के नाम से ही जाना जाता है।यह त्योहार यहां पर श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। इस दिन यहां पर बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है और टीका लगाकर आरती करती हैं और भाई अपनी बहन को उपहार देकर भविष्य में संकट के समय मदद करने का वचन देते हैं।  
  • उत्तर भारत में – उत्तर भारत में रक्षा बन्धन को कजरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग माता भगवती की पूजा करते हैं और अपनी अच्छी फसल की कामना करते हैैं।इस दिन खेत में गेहुं और दूसरे अनाज को  बोया जाता है।
  • दक्षिण भारत में – तमिलनाडु,केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और दक्षिण भारत में इस पर्व का बहुत अधिक महत्व है।यहां पर यह पर्व ब्राह्मणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।इस दिन यहां पर ब्राह्मण प्रातः स्नान करके अपने पवित्र धागे जनेऊ को बदलते हैं और मंत्रों का उच्चारण करते हैं।इसीलिए इस त्योहार को श्रावणी तर्पण या ऋषि तर्पण कहते हैं।दक्षिण भारत में रक्षा बन्धन को अवनि अबिंत्म कहा जाता है।

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हिन्दू धर्म के आलावा दूसरे धर्मों में रक्षा बंधन को कैसे मनाते हैं –

आइए दोस्तों जानते हैं कि दूसरे धर्मों में रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) को कैसे मनाते हैं।

  1. जैन धर्म में – जैन धर्म के अनुसार इस दिन विष्णु कुमार नाम के एक मुनिराज ने जैन मुनियों को धागा बांधकर उनकी रक्षा की थी। तब से रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार मनाया जाने लगा। जैन धर्म में आज के दिन उनके जैन पंडित लोगों को धागा देते हैं।और उसके बदले में लोग उन्हें दान देते हैं।
  1. सिख धर्म में – सिख धर्म में रक्षा बन्धन के त्योहार  रखड़ी और राखड़ी कहा जाता है। इस धर्म में भी इसे भाई – बहन के बीच मनाया जाता है। रक्षा बंधन का त्योहार सिख धर्म में  भी श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है।
  1. अन्य धर्मों में – इन सभी धर्मों के आलावा बौद्ध, ईसाई और मुस्लिम आदि धर्मों में भी बहुत लोग रक्षा बंधन के इस त्योहार को बड़ी ही धूम धाम से मनाते हैं।

भाई का बहन से दूर होने पर –

रक्षा बंधन पर यदि भाई बहन से दूर होता है तो बहन भाई के लिए राखी भेजती है और भाई भी बहन के लिए उपहार भेजते हैं।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का यह त्योहार क्या सिखाता है –

दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जीवन में हमें हर चीज़ कोई ना कोई सीख देकर जाती है।चाहे वह त्योहार ही क्यों ना हो।दोस्तों हर त्योहार हमें कोई ना कोई सीख देता है।आइए जानते हैं कि रक्षा बन्धन के इस त्योहार से हमें क्या सीख मिलती है।

  • रक्षा बंधन के इस त्योहार से हमें रिश्तों का महत्व समझ आता है।खासकर भाई – बहनों के पवित्र रिश्ते का।
  •  रक्षा बंधन भाई बहनों की एकता के महत्व को बताता है।
  • सामाजिक एकता का पता चलता है इस दिन सभी धर्मों के लोग एक दूसरे को राखी बांधते हैं। और एक ही जगह एकत्रित होते हैं।
  • रक्षा बंधन के इस त्योहार से एक दूसरे के प्रति त्याग और समर्पण की भावना का पता चलता है।
  • रक्षा बंधन खुशियों का त्यौहार है। खुश रहना और खुशियां बांटने के महत्व को बताता है।
  • पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता और संरक्षण के महत्व को बताता है।
  • यह त्योहार एक दूसरे के प्रति कर्तव्य निष्ठा को बताता है।

दोस्तों हम सबने रक्षा बंधन के बारे में इतनी तो जान ली। आइए दोस्तों अब हम आप सबको भाई – बहन के अटूट प्रेम की एक कहानी बताते हैं।

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भाई का बहन को वादा –

भाई बहन के रिश्ते को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। भाई बहन का रिश्ता त्याग,प्रेम,समर्पण और विश्वास का प्रतीक होता है।

एक बार की बात है एक गांव में एक बहुत ही मेहनती किसान अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था।उसके परिवार में कुल चार लोग रहते थे।वे दोनों पति – पत्नी और उसके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की। वे दोनों बच्चे बचपन से ही बहुत शरारती थे दोनों आपस में छोटी – छोटी बात पर लड़ते रहते थे। लेकिन दोनों भाई – बहनों में बहुत प्रेम था। वे दोनों एक दुसरे को बहुत मानते थे।एक बार वे दोनों साथ में स्कूल जा रहे थे और वहीं रास्ते में खेलने लगे और खेलने के दौरान भाई को चोट लग गई।बहन ने भाई को तुरन्त उठाया और चुप कराया और घर पर ले गई। घर पर डांट लगने की डर से बहन ने भाई को बचाने के लिए झूठ बोल दिया।भाई का पैर फिसल गया था और चोट लग गई।उस दिन भाई ने बहन को दिल से धन्यवाद दिया और वादा किया कि भविष्य में जब भी बहन पर कोई मुसीबत आएगी तो वह हमेशा उसकी रक्षा करेगा।

क्योंकि भाई – बहन का रिश्ता बहुत ही अटूट होता है। भाई – बहन की रक्षा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है।देखते- देखते दोनों भाई – बहन धीरे – धीरे बड़े हो गए और अपनी – अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाने लगे।कुछ दिन बाद बहन की शादी हो गई और वह अपने भाई से दूर हो गई।लेकिन भाई हर रक्षा बंधन पर अपनी बहन के घर राखी बंधवाने के लिए जाता था और बहन की रक्षा का प्रण लेता था।एक बार बहन की तबीयत बहुत खराब हो गई तब पता चला की उसकी किडनी खराब हो गई है।तब भाई ने बहन को अपनी एक किडनी देकर उसकी रक्षा की।और बहन की जान बचाई।

भाई बहन का रिश्ता बहुत ही अनमोल होता है।इस प्रकार भाई बहन के रिश्ते की तुलना  किसी और रिश्ते से नहीं की जा सकती।

पानी की बूंदों की तरह होती हैं बहनें

फूलों की पत्तियों की तरह नाजुक होती हैं बहनें

आसमां से उतारी हुई राजकुमारी की तरह होती हैं बहनें

सच कहूं  भाई की आंखों की राजदुलारी होती हैं बहनें

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Sadhana Kumari

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