Shivangi Swaroop Biography
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भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट शिवांगी स्वरूप की कहानी – Shivangi Swaroop Biography

दोस्तों आज मैं एक ऐसी महिला की कहानी (Shivangi Swaroop Biography) बताने जा रही हूं जिसने यह साबित कर दिया है कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं। वह हर क्षेत्र में काम कर सकती हैं। बस हौंसला,जज्बा और लगन होनी चाहिए। दोस्तों हम बात करेंगे इंडियन नेवी की पहली महिला (Shivangi Swaroop Biography) सब लियूटेनैंट (Lieutenant) शिवांगी स्वरूप की। जो बिहार के मुज्जफरपुर जिले की रहने वाली हैं। जिन्होंने बचपन में पायलट बनने का सपना देखा और आज इस सपने को पूरा भी किया है। हम इनके हौंसले जज्बे और इनकी जीत की काहनी जानेंगे। जिनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिख चुका है। दोस्तों आपने लोगों को यह बात करते हुए तो सुना ही होगा कि अगर हौंसले बुलंद हों तो मंजिल तक जाने से कोई नहीं रोक सकता है। जी हां दोस्तों इस बात को सत्य कर दिखाया भारतीय नौसेना की महिला पायलट शिवांगी स्वरूप ने। – (Shivangi Swaroop Biography)

दोस्तों आपको पता होगा कि पुराने समय में एक बात कही जाती थी कि बाहर का काम पुरुष देखेंगे और घरों  का काम औरतें संभालेंगी। उस समय औरतों को घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता था।इस बात को गुजरे जमाना हो गया।आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं उन्होंने अपने हौंसले और मेहनत से यह बात साबित कर दी है कि यदि उन्हें मौका मिलेगा तो वे न सिर्फ आसमान को छू सकती है बल्कि आसमान में उड़ान भी भर सकती हैं।

आइए जानते हैं कि शिवांगी ने अपने  पायलट बनने के लक्ष्य को किस प्रकार हासिल किया और क्या है इनकी सफलता का राज।

शिवांगी का प्रारम्भिक जीवन  –

  • शिवांगी का जन्म 15 March 1995 को बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के पारो नामक गांव में हुआ है।
  • इनके पिता का नाम हरि भूषण सिंह और माता का नाम प्रियंका सिंह है।इनके पिता एक सरकारी स्कूल में Principal हैं और माता House wife हैं।
  • शिवांगी एक Civillian Background से Belong करती हैं।

(Shivangi Swaroop Biography)

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शिवांगी की शिक्षा –

  • शिवांगी पढ़ने में बहुत मेधावी छात्रा थी। शिवांगी ने अपनी 10 वीं तक की पढ़ाई मुजफ्फरपुर के DAV Public School से की है।इन्होंने सन 2010 में 10 वीं की परीक्षा CBSE board से उत्तीर्ण की है।जिसमें उन्हें 10 सीजीपीए मिले थे।
  • उसके बाद इन्होंने DAV  Public School  से अपनी 12 वीं की पढ़ाई Science Subject से की। 
  • शिवांगी के टीचर एम.के.झा बताते हैं कि शिवांगी का साइंस के प्रति हमेशा से झुकाव रहा है वह कभी भी साइंस की क्लास मिस नहीं करती थी। वह बताते हैं कि वह हमेशा साइंटिस्ट के बारे और इंडियन एयरोनोटिकल की बातें किया करती थी।शिवांगी के टीचर कहते हैं कि क्लास में जब भी साइंस का कोई Experiment होता था तो वह उसमें सबसे आगे रहती थी और बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थी। वह Experiment के सारे Instrument पहले की खोज कर रख लेती थी। 
  • 12 वीं करने के बाद इन्होंने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। शिवांगी ने Sikkim Manipal Institute Of Technology से  Mechanical Engineering से B.tech किया है।
  • उसके बाद शिवांगी ने Malaviya National Institute Of Technology से अपनी M.Tech की पढ़ाई पूरी की।

कैरियर –

  • शिवांगी SSC (Short Service Commission) के पायलट प्रवेश स्कीम के तहत Indian Navy में शामिल हुई। और 2018 में इंडियन नेवी में Commisioned हो गई।
  • शिवांगी ने छह छह महीने के दो कोर्स किए – पहला कोर्स उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी से  Naval orientation किया। और दूसरा कोर्स भारतीय वायुसेना अकादमी में किया जहां पर उन्होंने Pilatus PC  7 Mkll aircraft की ट्रेंनिग की।
  • शिवांगी ने तीसरी ट्रेनिंग –  पिछले छह महीने दिसंबर 2019 में कोच्चि में इंडियन नेवल स्क्वाड्रन 550 के साथ डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट उड़ाना सीखा।
  • शिवांगी को 4 Dec 2019 को नौसेना दिवस पर होने वाले समारोह में बैज लगाया गया।और कोच्चि में ऑपरेशनल ड्यूटी संभालने का काम दिया गया।
  • अब यह Navy में फिक्स्ड विंग डोर्नियर 228 सर्विलांस एयरक्राफ्ट उड़ाएंगी। ये एयरक्राफ्ट Navy में पैट्रोलिंग के काम आता है।
  • इस एयरक्राफ्ट में एडवांस सर्विलांस रेडार, नेटवर्किंग और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर जैसे Instrument लगे हैं। यह Plane कम दूरी के समुद्री मिशन पर भेजा जाता है।

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पायलट बनने का सपना कब देखा –

शिवांगी कहती हैं जब वह 10 साल की थी तो वह अपने नाना के घर गई थी उनके नाना के गांव में एक Minister हेलीकॉप्टर से आए थे और सब लोग उन्हें देखने जा रहे थे तब वो भी अपने नाना जी के साथ गई और इन्होंने देखा एक पायलट उस हेलीकॉप्टर को उड़ा रहा था यह देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और तभी उन्होंने सोचा कि अगर मौका मिलेगा तो मै भी पायलट बनूंगी। और आज इन्होंने अपने बचपन के सपने को पूरा कर दिखाया।

Defense में जाने का सपना कब देखा –

  •  शिवांगी बताती हैं उन्हें नौसेना के बारे में कुछ नहीं पता था।जब वह कॉलेज में पढ़ रही थी तो last year में कॉलेज में यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के लिए Nevy के कुछ लोग आए थे। उन लोगों ने कॉलेज में एक Presentation दिखाई थी जिसमें Navy के बारे में बताया गया था। उसमें Navy के एक ऑफिसर थे जिन्होंने White Color की यूनिफॉर्म पहनी थी। उनकी Dress देखकर शिवांगी बहुत Attract हुई और तभी से शिवांगी ने Defense में जाने के बारे में सोच लिया था।
  • तभी उन्हें पता चला कि नौसेना में पायलट के तौर पर महिलाओं की एंट्री शुरू हो रही है और तभी उन्होंने ठान लिया कि मुझे Defense में जाना है।
  • आपको बता दें कि नौसेना में अभी भी महिलाओं को जहाज में नहीं जाने दिया जाता है। शिवांगी कहती हैं कि अभी भले ही महिलाओं को नौसेना की जहाज में जाने की Permission नहीं है लेकिन आने वाले समय में अगर मौका मिला तो मैं यह भी करके दिखाऊंगी।

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शिवांगी का Training के Time क्या Experience रहा है –

शिवांगी कहती है Training के Time पर जब उन्हें अकेले जहाज ले जाना था उनकी सोलो जब Start हुई थी तब उन्हें डर लग रहा था कि वे अकेले जहाज को ले जा पाएंगी या नहीं लेकिन वह कहती हैं कि टेक ऑफ करने के बाद सारा डर निकल गया। वह बताती हैं कि वो एक अलग ही Feeling, अलग ही Experience होता है जब आप ऊपर से देखते हैं कि सारी दुनिया कितनी छोटी दिख रही है।

शिवांगी अपने आगे के Plan के बारे में बताती हैं कि उनका यह ऑपरेशन पूरा हो जाए फिर वह  P8I  विमान उड़ाना चाहती हैं यह एक बहुत बड़ा एयरक्राफ्ट है। जिसकी रेंज ज्यादा है और यह ज्यादा टाइम के लिए उड़ सकता है।

माता – पिता का Support –

  •  शिवांगी के पिता कहते हैं की शिवांगी बचपन से ही हर काम को चुनौती की तरह लेती थी।जब उसने डिफेंस में जाने का फैसला लिया तब मैंने उसका पूरा Support किया।
  • शिवांगी के पिता कहते हैं कि मैं सभी पैरेंट्स से कहना चाहता हूं कि बेटे या बेटी में फर्क न करें सभी का Support करें वह कहते हैं कि करना तो बच्चों को ही होता है बस माता पिता का साथ होना उनका सपोर्ट करना जरूरी है।वह कहते हैं मैंने कभी अपनी बेटी को कमजोर नहीं समझा।
  • शिवांगी की माता कहती है कि मैंने कभी अपनी बेटी को उसके सपने पूरा करने से नहीं रोका मैं हमेशा उसका Support करती थी। वह कहती हैं कि मैं कहती थी जो तुम्हें अच्छा लगता है करो मैंने कभी उसे उसके सपने से पीछे हटने नहीं दिया। वह कहती हैं मेरा एक बेटा और एक बेटी ओर भी है शिवांगी सबसे बड़ी है इसे देखकर उन सबको प्रेरणा मिलती है वे भी देश की रक्षा करना चाहते हैं।

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शिवांगी की कामयाबी से उनके परिवार के लोग बहुत खुश हैं –  

  • उनके पिता कहते हैं कि मुझे यह सोचकर अपनी बेटी पर गर्व होता है कि मेरी बेटी देश की रक्षा करने लगी है। मैं एक टीचर हूं मेरी बेटी एक साधारण परिवार से होने के बावजूद इतनी बड़ी ऊंचाई पर पहुंची है।
  • उनके पिता कहते हैं ऐसे तो मुझे खुशी है ही लेकिन जब कोई दूसरा कहता है कि आपकी बेटी ने बहुत ही अच्छा काम किया है तो यह सुनकर बहुत खुशी होती है बहुत अच्छा लगता है।वह कहते हैं आज बेटी की वजह से मेरा नाम रोशन हुआ है।

आइए देखते हैं शिवांगी अपनी इस कामयाबी पर क्या  कहना चाहती हैं –

  • शिवांगी कहती हैं कि Training के दौरान मुझे यह बताया गया था कि प्लेन उड़ाने में जेंडर मायने नहीं रखता। प्लेन को यह पता नहीं होता कि आप महिला हो या पुरुष मायने यह रखता है कि आपमें प्लेन उड़ाने का हुनर है या नहीं।
  • शिवांगी कहती हैं कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं इस जगह पर पहुंचूंगी।वह कहती हैं कि मैं अपनी इस कामयाबी से बहुत खुश हूं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि मैंने दूसरों के लिए मिसाल कायम की है। मैं सभी लड़कियों के लिए प्रेरणस्रोत बनी हूं कि लड़कियां कमजोर नहीं हैं वह हर श्रेत्र में जा सकती हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में भी महिलाओं के लिए रास्ता खोल दिया है।

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शिवांगी की इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि –

  1. अगर कोई व्यक्ति ठान ले कि हमें यह काम करना है तो चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों ना हो वह सपना वह काम जरूर पूरा होता है।
  1. अगर हम जीवन में कोई भी काम चुनौती समझकर करें तो सफलता जरूर मिलती है।
  1. पैरेंट्स को हमेशा अपनी बेटियों का Support बेटों की तरह करना चाहिए बेटियों को कभी बेटों से कम या कमजोर नहीं समझना चाहिए।

शिवांगी ने ऐसा काम करके दिखाया है कि आज उनके राज्य बिहार में हर लड़की को सीख मिली है प्रेरणा मिली है। कि कोई भी काम कठिन नहीं है बस लगन होनी चाहिए। उनकी इस सफलता को देखकर उनके राज्य की ही नहीं बल्कि ऑल इंडिया की सभी लड़कियां आगे बढ़ेंगी और अपने समाज और अपने परिवार का नाम उजागर करेंगी।

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Sadhana Kumari

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I am a content writer and blogger. I like to write short articles in the fields of Innovation, Technology and Biography. My hobbies are watching the news, cooking and reading the failure stories.

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