Janmashtami
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जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? इसका क्या महत्व है? – Shree Krishna Janmashtami in Hindi

दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) श्री कृष्णा जी जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भारत देश विभिन्न परंपराओं और विविधताओं वाला देश है। यह धर्म और संस्कृति में विश्वास रखने वाला देश है। भारत देश में हर साल अनेकों त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसे में एक त्योहार है श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) का। यह त्योहार भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों (जहां भारतीय लोग रहते हैं) में भी बड़ी धूमधाम, आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के रूप में मनाया जाता है। गोकुल में इस त्योहार को गोकुलाष्टमी कहते हैं। दोस्तों आइए हम इस Article में जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) के बारे में विस्तार से जानते हैं –

Table of Contents

जन्माष्टमी क्या है ?

  • जन्माष्टमी का त्योहार भगवान श्री कृष्ण जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।जन्माष्टमी दो शब्दों से मिलकर बना है जन्म + अष्टमी।
  • जिसका अर्थ है भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात को रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु ने माता देवकी के आठवें पुत्र यानि कि श्री कृष्ण जी के रूप में जन्म लिया।
  • कंश का वध करने तथा धरती को पापों से मुक्त करने के लिए।तभी से इस दिन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। यह त्योहार मथुरा और द्वारिका में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।  

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार कब मनाया जाता है?

  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हिन्दू पंचांग के अनुसार  भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष के रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि  मनाया जाता है। 
  • कहा जाता इस नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा ग्रह अपनी उच्च राशि में होते हैं।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का क्या महत्व है?

  • हिन्दू धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म के लोग भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं। इसलिए हर साल अपने आराध्य यानि भगवान श्री कृष्ण जी को याद करने के लिए हिन्दू धर्म के अनुयायी उनका जन्मदिन एक त्योहार के रूप में मनाते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। क्योंकि श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं।
  • जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा और व्रत करने से मन शांत होता है, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा भगवान श्री कृष्ण जी की कृपादृष्टि बनी रहती है।
  • कहा जाता है कि वासुदेव जी की एक ओर पत्नी थी जिनका नाम रोहिणी था जब वासुदेव जी और माता देवकी को कंस ने जेल में डाला था तो रोहिणी नंद बाबा के यहां गोकुल चली गई थी। कृष्ण के बडे़ भाई बलराम माता रोहिणी के पुत्र थे। अतः श्री कृष्ण और बलराम दोनों भाइयों का पालन पोषण नंद बाबा के यहां गोकुल धम में हुआ था।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? और श्री कृष्ण जी का जन्म कैसे हुआ ?

  • पौराणिक ग्रंथों में ऐसा लिखा है कि भगवान विष्णु ने धरती पर बढ़ रहे पापों को खत्म करने के लिए श्री कृष्ण जी के रूप में अवतार लिया था।
  • 5200 साल पहले मथुरा का राजा कंश था।वह बहुत ही अत्याचारी था। उसके अत्याचार प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे।
  • कंश की एक बहन थी जिसका नाम देवकी था। कंश अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। 
  • देवकी जी का विवाह द्वारिका के राजा उग्रसेन के पुत्र वासुदेव जी से हुआ। विवाह के दिन एक आकाशवाणी हुई कि कंस की बहन देवकी के आठवें पुत्र के हाथों कंश का वध होगा।
  • कंश बहुत डर गया था और उसने देवकी और वासुदेव को कालकोठरी में डाल दिया।कंश ने देवकी के सात पुत्रों को मार डाला।
  • फिर एक दिन जेल में तीव्र प्रकाश हुआ और भगवान विष्णु प्रकट हुए और देवकी माता से बोले कि मैं आपके आठवें पुत्र के रूप में जन्म ले रहा हूं।
  • जिस दिन श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था उस दिन चारों तरफ अंधेरा था बहुत तेज बारिश हो रही थी। जब भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण जी के रूप के जन्म लिया तो वह दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि थी।उस दिन रोहिणी नक्षत्र था। 
  • श्री कृष्ण जी के जन्म लेते ही चमत्कार हो गया।कारगर के सभी पहरेदार सो गए और कारागार के द्वार अपने आप खुल गए। वासुदेव और देवकी की बेड़ियां खुल गई।
  • जब वासुदेव किसी तरह नवजात शिशु यानि श्री कृष्ण जी को लेकर अपने मित्र नंद बाबा के यहां गोकुल जा रहे थे तो उफनाती हुई यमुना नदी अपने आप शांत हो गई और जाने के लिए रास्ता बना दिया। 
  • उसी दिन नंदबाबा के यहां उनकी पत्नी माता यशोदा की कोख में एक कन्या ने जन्म लिया था।
  • तब वासुदेव ने माता यशोदा के पास श्री कृष्ण जी को सुला दिया और उस कन्या को लेकर चले गए।
  • कंश उस कन्या को मार डालना चाहता था इसलिए उसने उसे जमीन पर पटक दिया लेकिन वह कन्या मायावी थी और वह नहीं मरी उसने कहा कंश तुझे मारने वाला जन्म ले चुका है।इस प्रकार कंश उस कन्या को मारने में असफल रहा।
  • श्री कृष्ण जी के जन्म से गोकुल में खूब खुशियां मनाई गई और ढेर सारी मिठाईयां बांटी गई नाच – गाना हुआ।
  • श्री कृष्ण जी का जन्म तो जेल में हुआ था लेकिन उनका पालन पोषण माता यशोदा और नंदबाबा ने किया था।
  • श्री कृष्ण जी बचपन से ही बहुत नटखट और शरारती थे।उन्होंने बचपन में ही अपने मामा कंश द्वारा किए गए कुप्रयासों को असफल कर दिया और बचपन में ही मामा द्वारा भेजे गए राक्षसों को भी मार डाला। और अंत में श्री कृष्ण जी ने अपने मामा कंश का भी वध कर दिया।
  • इसलिए हिन्दू धर्म में भक्त अपने आराध्य श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के रोहिणी नक्षत्र में  शुक्लपक्ष  की अष्टमी की मध्यरात्रि को श्री कृष्ण जी के जन्मोंत्सव के रूप में मनाते हैं।
  • इस दिन लोग व्रत रखतें हैं और पूजा भी करते हैं तथा मंदिरों को सजाते हैं।
https://youtu.be/dI9I2Gj4DmI

(Shree Krishna Janmashtami in Hindi)

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जन्माष्टमी का त्योहार कैसे मानते हैं?

  • जन्माष्टमी का त्योहार मनाने का सबका अपना अलग – अलग तरीका है हर राज्य में  अलग – अलग तरीके से जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) का त्योहार मनाया जाता है।कहीं – कहीं पर भगवान श्री कृष्ण जी को झूला झुलाया जाता है, तो कहीं पर भगवान श्री कृष्ण की झांकी सजाई जाती है।तो कहीं पर दही मटकी फोड़ने की परम्परा है।
  • जन्माष्टमी के दिन कहीं कहीं पर फूलों की होली खेली जाती है।और कहीं कहीं पर रंगों की भी होली खेली जाती है।
  • मथुरा और द्वारिका में कृष्ण जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।मथुरा में मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।
  • मथुरा में इस दिन झाकियां सजाई जाती हैं तथा गोपियों द्वारा रासलीला भी की जाती है।जन्माष्टमी के दिन पूरा मथुरा कृष्णमय हो जाता है।
  • मथुरा में बहुत दूर – दूर से श्रद्धालु श्री कृष्ण की मनमोहक छवि देखने के लिए आते हैं।

दही मटकी फोड़ने की परम्परा कैसे प्रारम्भ हुई?

  • शास्त्रों में कहा गया है कि श्री कृष्ण जी को माखन, दूध और दही बहुत पसंद था।श्री कृष्ण जी बहुत ही नटखट और शरारती थे। वे गोपियों की मटकी से माखन चुरा कर खा जाते थे।जिससे गोपियां माता यशोदा के पास उनकी शिकायत लेकर जाती थी और एक बार उन्हें माता यशोदा ने माखन चोरी से रोकने के लिए खंभे में बांध दिया था।लेकिन माता के समझाने और बांधने पर भी उन पर कोई असर नहीं पड़ता था।
  • माखन को श्री कृष्ण जी से बचाने के लिए गोपियां दही की मटकी को ऊपर ऊंचाई पर लटका देती थी। लेकिन श्री कृष्ण जी अपनी समझदारी और चतुराई से दोस्तों के साथ मिलकर सारा माखन खा जाते थे।
  • इसलिए उन्हें माखन चोर के नाम से भी जाना जाता है।श्री कृष्ण जी की इन्हीं लीलाओं को याद करने के लिए दही हांडी की परंपरा मनाई जाती है।
  • यह परम्परा गुजरात और महाराष्ट्र में ज्यादा देखने को मिलती है।

झांकी कैसे सजाई जाती है?

  • जन्माष्टमी का त्योहार लोग बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं। जन्माष्टमी के दिन लोग पूजा और व्रत रखने के साथ ही झाकियां भी सजाते हैं।घरों और कई मंदिरों पर बाल कृष्णलीला का पूरा वृतांत होता है और श्री कृष्ण के पूरे जीवनकाल के बारे में बताया जाता है।
  • लोग अपने घरों में भी बहुत अच्छी झाकियां  सजाते हैं।और रात भर भजन कीर्तन करते हैं।तथा जागरण करते हैं।

श्री कृष्ण को झूला कैसे झुलाते हैं?

  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत के साथ – साथ भगवान श्री कृष्ण जी को झूला झुलाने की परम्परा है। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को झूला झूलना बहुत पसंद था।इसलिए आज के दिन बाल गोपाल को झूला झुलाने का बहुत महत्व है आज के दिन लोगों में बहुत उत्साह होता है। 
  • जन्माष्टमी में दिन पालने में भगवान श्री कृष्ण की बल्यवस्था की छोटी सी मूर्ति को रखकर धीरे-धीरे हिलाया जाता है। इस दिन लोग सारी रात जागरण करते हैं और भजन कीर्तन करते हैं।जन्माष्टमी के दिन ऐसा करने से बहुत सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 

जन्माष्टमी के पहले से क्या – क्या तैयारियां की जाती हैं ?

  • जन्माष्टमी के लिए Market  पहले से ही सज जाते हैं और बाजारों में धूम मच जाती है तथा खरीदारी होने लगती है।
  • मंदिरों को सजाने के लिए सजावट का सामान खरीदा जाता है। श्री कृष्ण की मूर्तियां खरीदी जाती हैं।उनके लिए नए – नए कपड़े खरीदे जाते हैं। उनका श्रृंगार करने के लिए सामान खरीदा जाता है। कृष्ण के लिए झूला खरीदा जाता है। झांकी सजानें के लिए सामान खरीदा जाता है।
  • ऐसे ही अनेकों चीज़ें खरीदी जाती हैं जैसे पूजा की समाग्री, प्रसाद और पकवान बनने की समाग्री इत्यादि।

जन्माष्टमी पर क्या पकवान बनाए जाते हैं ?

कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण जी को मीठा बहुत पसंद था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन घरों में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैैं और इन्हें ही प्रसाद के रूप में दिया जाता है।और बाल गोपाल को खुश किया जाता है।

  • आटे या धनिया की पंजीरी 
  • मखाना पाग
  • माखन मिश्री
  • पंचामृत
  • मखाने की खीर

ये सभी पकवान जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) के दिन बनाए जाते हैं। और इन सबको प्रसाद के रूप में दिया जाता है। क्योंकि ये सभी पकवान बाल गोपाल के प्रिय हैं।

आइए अब जानते हैं कि जन्माष्टमी के दिन व्रत का अनुष्ठान और पूजा कैसे करें ?

पूजा के लिए क्या समाग्री होनी चाहिए?

पूजा के लिए बहुत सारी सामग्री की आवश्यकता होती है –

पूजा के लिए –

दो दीपक, बाती, शुद्ध देसी घी, अगरबत्ती, धूपबत्ती, माचिस, पूजा की थाली, शंख, घंटी, कपूर, रोली, चंदन, सजा हुआ कलश, सुपारी, पान, खीरा, पंचामृत, आम के पत्ते, तुलसी, मौसमी फल और कपड़ा आदि।

अभिषेक करने के लिए –

एक थाली,श्री कृष्ण जी की बाल रूप की एक मूर्ति,दूध,शहद,देशी घी,दही और मिश्री।

श्रृंगार करने के लिए –

वस्त्र,मोर पंख,बांसुरी, गन्ध, इत्र, फूल माला इत्यादि।

भोग के लिए –

श्री कृष्ण के पसंद का आप कोई भी पकवान ले सकते हैं जैसे – धनिया या आंटे की पंजीरी, मखाने की खीर, पंचामृत, मखाना पाग, माखन मिश्री, दूध और दही ले सकते हैं। आप फलों का भी भोग लगा सकते हैं। भोग में तुलसी का प्रयोग जरूर करें।

व्रत कैसे करते हैैं?

व्रत भी दो प्रकार से किया जाता है।जैसी हमारी सामर्थ्य है जैसा भाव है हम उसके अनुसार व्रत कर सकते हैं। आप  चाहें तो फलाहार या निर्जल व्रत रख सकते हैं।

फलाहार व्रत –

फलाहार व्रत में आप दिन में पानी पी सकते हैं और कुछ फल खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे अनाज का प्रयोग कदापि ना करें। फलाहार व्रत आसान होता है 

निर्जला व्रत –

इस व्रत में सप्तमी की रात 12 बजे से अष्टमी की मध्यरात्रि तक बिना पानी पिए हुए व्रत रखा जाता है। यह व्रत कठिन होता है।

(Shree Krishna Janmashtami in Hindi)

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व्रत की शुरुआत और संकल्प किस प्रकार किया जाता है ?

  • सप्तमी की रात को हल्का भोजन करें और रात को 12 बजे के बाद कुछ भी ना खाएं।
  • अष्टमी के दिन सुबह उठकर रोज के कामों को खत्म करके घर की साफ सफाई कर लें।
  • उसके बाद स्नान करें और साफ सुथरे कपड़े पहन लें।
  • जो भी व्यक्ति व्रत करना चाहता है।वह अपने घर के मंदिर में उत्तर और पूर्व की तरफ मुंह करके बैठ जाएं।
  • अपने घर में आप जिनकी पूजा करते हैं उनका ध्यान करें जैसे कि अपने ईष्ट देव, पूरे परिवार में पूजे जाने वाले कुलदेवता और अपने गुरु का पूरी श्रद्धा और शांत मन से ध्यान करें।
  • उसके बाद तीन बार आचवन करना है।इसके लिए अपने घर के मंदिर में रखे जल के बर्तन से एक चम्मच जल निकालकर अपने दाएं हाथ में ले लें।
  • उसके बाद श्रद्धापूर्वक ॐ कृष्णाय नमः का जाप करते हुए उस जल को पी लें। ऐसा तीन बार करें।
  • आचवन लेने वाले हाथ को जल से धो लें और उसी हाथ में थोड़ा सा जल और चावल लेकर आंखें बंद करके भगवान श्री कृष्ण जी का स्मरण करें या ध्यान करें। और मन ही मन संकल्प लें। कि (मैं अपना नाम जन्माष्टमी को पूरे विधि विधान से आपकी पूजा और व्रत करना चाहती हूं। कृपया आप मेरी प्रार्थना स्वीकार करें।)
  • व्रत का संकल्प लेते समय इस मंत्र का जाप करें

ममखिलपापप्रशमन पूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये,

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत महं करिष्ये।

  • अब अपने हाथ में लिए हुए जल और चावल को ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करते हुए भगवान श्री कृष्ण जी के सामने रख दें। और इनकी पूजा करें तथा झूला  झुलाये।
  • सुबह पूजा आदि करने के बाद दोपहर में काला तिल से मिले हुए जल से स्नान करें। ऐसा माना जाता है कि काले तिल के पानी से स्नान करने से राहु, केतु, क्रूर ग्रहों  को शांति मिलती है। इससे इनका कुप्रभाव कम होता है।

पूजा कैसे करें? पूजा की विधि

  • शाम को 11 बजे नहाकर पवित्र हो जाएं और  मंदिर जाएं या फिर घर के मंदिर में पूरे विधि विधान से पूजा करें।
  • सबसे पहले पूजा स्थल पर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें और वहां पर भगवान श्री कृष्ण जी की मूर्ति और मूर्ति के बगल एक खीरा डंठल सहित रखें। मूर्ति के बगल चावल का ढेर बनाकर कलश रख दें।फिर कलश में जल भरें और रोली,चंदन और चावल कलश पर चढ़ाएं।
  • उसके बाद कलश में सुपारी और एक सिक्का डालें और कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें।फिर उसके ऊपर नारियल रख दें।
  • कलश पर लाल या पीले रंग का कपड़ा चढ़ाएं और रोली तथा अक्षत चढ़ाकर आंखें बन्द करके मन ही मन कलश से प्रार्थना करें।
  • श्री कृष्ण जी का जन्म होने के तुरंत बाद ही 12 बजे डंठल लगे हुए खीरे को किसी सिक्के की मदद से डंठल की जगह से काट कर खीरे को अलग कर दें। ऐसा इसलिए किया जाता है जैसे एक मां की कोख से जब बच्चा जन्म लेता है तो उसकी गर्भनाल को काट कर उसे अलग किया जाता है। ठीक उसी प्रकार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर डंठल लगे हुए खीरे को गर्भनाल मानकर काटा जाता है और माना जाता है कि श्री कृष्ण जी को माता देवकी से अलग कर दिया गया।
  • उसके बाद घंटी और शंख बजाएं। क्योंकि घंटी और शंख बजाने से बुरी और अशुभ  शक्तियों का नाश होता है।और शुभ शक्तियां एकत्रित होती हैं।
  • अब मंदिर में रखी सभी सामग्रियों और सभी भक्तों पर मंदिर के जल से छिड़काव करें और वहां पर रखे बर्तनों, पकवानों और पागों पर तुलसी और अक्षत डालें।
  • उसके बाद अपने दाएं हाथ में जल, अक्षत और फल लेकर 15 बार ॐ कृष्णाय नमः का जाप करें। और हाथ में ली हुई समाग्री को भगवान श्री कृष्ण जी की मूर्ति को अर्पित कर दें।
  • अब श्री कृष्ण जी की बाल मूर्ति को पंचामृत स्नान कराएं।सबसे पहले कृष्ण जी की मूर्ति को एक थाल में रखें और सबसे पहले दूध फिर दही, घी, शहद और शक्कर से पंचानन स्नान कराएं।
  • उसके बाद मूर्ति को पानी से स्नान कराकर चरणामृत को पहले से बने पंचामृत में मिला लें।
  • अब श्री कृष्ण जी का नाम लेते हुए मूर्ति पर चंदन और सुगन्ध अर्पित करें। तथा मूर्ति के चारों ओर पूजा जल से छिड़काव करें।
  • उसके बाद भगवान श्री कृष्ण जी को वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें।
  • धूप तथा अगरबत्ती जलाकर मन ही मन  ॐ कृष्णाय नमः का जाप करते रहें।
  • अब भगवान श्री कृष्ण जी को का उच्चारण करते हुए या फिर त्वम देवांम वस्तु गोविंदम तुभ्यमेव समर्पयेत! मंत्र का जप करते हुए 9 बार बर्तनो को छूते हुए भोग लगाएं। और श्री कृष्ण जी से प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध करें। भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता होना जरूरी है। तुलसी के बिना श्री कृष्ण जी को लगाया गया भोग स्वीकार नहीं होता।इस बात का खास ध्यान रखें।
  • उसके बाद फल, जल,पान तथा दक्षिणा के रूप में कुछ रुपए चढ़ाकर श्री कृष्ण जी को धीरे- धीरे झूला झुलायें।
  • अब आरती की थाली सजाएं और थाली में कपूर तथा दीपक जलाकर घंटी और शंखनाद बजाते हुए सामूहिक आरती करें। आरती खत्म होने के बाद सबको आरती दें।
  • जिसने व्रत रखा है वो भगवान के सामने हाथ जोड़कर भगवान से क्षमा याचना करे कि यदि पूजा में जाने अनजाने में कोई भूल हो गई है तो उसके लिए माफी मांगे।
  • उसके बाद सबको प्रसाद बांटें।और अपना व्रत समाप्त करें।

व्रत समाप्त कैसे करें?

  • अष्टमी की मध्यरात्रि को श्री कृष्ण जी का जन्मोत्सव हो जाने के बाद पूजा समाप्त करके भगवान श्री कृष्ण जी को भोग लगा दें। और सबको प्रसाद बांट दें।
  • अब सब कुछ खत्म करने के बाद बाल गोपाल के जन्म के उपरान्त पानी पी कर व्रत तोड़ दें।
  • अगले दिन सुबह बाल गोपाल के जन्म के उपरान्त बचे हुए पूजा जल को तुलसी पर चढ़ा दें और भगवान श्री कृष्ण जी के भोग के लिए निकाले गए प्रसाद को स्वयं ग्रहण करके अपना व्रत समाप्त कर दें।

व्रत रखने का क्या महत्व है ?

  • ऐसा माना जाता है कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने से घर में सुख समृद्धि आती है और शांति बनी रहती है।
  • जन्माष्टमी के दिन पूरे विधि विधान से व्रत करने से घर में लक्ष्मी आती है और सभी बिगड़े काम बनते हैं।
  • ऐसा माना जाता है इस दिन जो लोग व्रत करते हैं उन्हें ऐश्वर्य और मुक्ति की प्राप्ति होती है।
  • कुछ ग्रंथों और पुराणों में ये मान्यता है कि जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) के दिन व्रत करने से व्यक्ति इसी जन्म में सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करके अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
  • कुछ लोग जन्माष्टमी के दिन व्रत इसलिए रखते हैं क्योंंकि ऐसी मान्यता है कि व्रत करने से यश,कीर्ति, आयु में वृद्धि और पुत्र की प्राप्ति होती है।

जन्माष्टमी पर व्रत न करने से क्या होता है?

  • स्कन्द पुराण में यह माना गया है कि जो व्यक्ति जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami in Hindi) के दिन जानबूझकर व्रत नहीं करता वह जंगलों में सांप के रूप में जन्म लेता है।
  • भविष्य पुराण का एक कथन है कि यदि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को यानि की जन्माष्टमी को लोग व्रत नहीं रखते हैं वो लोग क्रूर राक्षस होते हैं।उनके घर में कभी भी सुख और शांति नहीं होती है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को मोहरात्री क्यों कहा जाता है?

क्योंकि ऐसा माना जाता है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण जी का नाम जपने,उनका ध्यान करने और रातभर मंत्र जपते हुए जगने से संसार के सभी प्रकार की मोह माया से छुटकारा मिलता है। इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी को मोहरात्री कहा जाता है।

दोस्तों इस प्रकार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ मनाइए। 

जय श्री कृष्णा 🙏

(Shree Krishna Janmashtami in Hindi)

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Sadhana Kumari

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