Why Independence Day is Important for Indians
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भारतीयों के लिए स्वतंत्रता दिवस क्यों महत्वपूर्ण है? – Why Independence Day is Important for Indians

Why Independence Day is Important for Indians? क्या आप जानते है भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को ही क्यों मिली थी और वो भी रात में ठीक 12 बजे। दोस्तो 15 अगस्त 2020 को हम अपने देश की आजादी (Why Independence Day is Important for Indians) का 74 वा स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। हर वर्ष 15 अगस्त के दिन पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाता है लेकिन दोस्तो क्या कभी आपने सोचा है कि इस दिन में आखिर क्या खास बात थी कि हमे 15 अगस्त 1947 को ठीक रात को 12 बजे ही स्वतंत्रता मिली तो आइए एक – एक करके इन सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से आपको हम जानकारी शेयर करने जा रहे हैं कि हमे आजादी 15 अगस्त के दिन ही क्यों मिली। 1947 को ही क्यों मिली। ठीक रात को 12 बजे ही क्यों मिली तो आइए जानते हैं। 

वर्ष 1947 ही क्यों आजादी का वर्ष रहा – 

  • दोस्तो गांधी जी के आंदोलन से देश की जनता आजादी के लिए पूरी तरह से जागरूक हो गई थी और वही दूसरी तरफ सुभासचंद्र बोस के आजाद हिन्द फौज की गतिविधियों ने अंग्रेज़ शासकों के नाक में दम कर रखा था।
  • सन् 1943 के द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के समय पर अंग्रेजो की आर्थिक हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी। उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि बद से बत्तर हो चुकी थी।
  • दूसरे देशों कि तो बात छोड़ दे हम वो अपने खुद के देश में शासन करने में भी असमर्थ हो गए थे। वहीं 1943 के ब्रिटिश चुनाव में लेबर पार्टी की जीत ने आजादी के पूरे द्वार खोल दिए क्योंकि उन्होंने अपने Manifesto में भारत जैसी दूसरी इंग्लिश कोलिनिया को भी आजादी देने की बात कहीं थी। कई मतभेदों और हंग्गामो के बाद में भारतीय नेताओं की बात लार्ड वेवेल से शुरू हो गई थी और स्वतन्त्र भारत का सपना सच होने की कगार पर था।
  • फरवरी 1947 में लॉर्ड माउंट बेटन को भारत का आखरी वायसराय चुना गया। जिस पर व्यवस्थित तरीके से भारत को स्वतंत्रता दिलाने का कार्यभार था। शुरुआती योजना के अनुसार भारत को जून 1948 में आजादी मिलने का प्रावधान किया गया।
  • वायसराय बनने के तुरन्त बाद लार्ड माउंट बेटन ने भारतीय नेताओं से बातचीत शुरू की लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था। जिम्मा और नेहरू जी के बीच बटवारे को लेकर पहले से ही रस्साकशी चल रही थी तो जिम्मा ने एक अलग देश बनाने की मांग रख दी थी और जिसकी वजह से भारत के कई क्षेत्रों में भयंकर सांप्रदायिक झगड़े शुरू हो गए थे।
  • ग्रह युद्ध कि स्थिति हो गई थी। माउंट बेटन ने इसकी अपेक्षा नहीं की थी और इससे पहले की हालत और ज्यादा बिगड़ते और बात्तर होते माउंट बेटन ने निर्णय लिया कि आजादी 1948 की जगह 1947 में ही दे दी जाएं तो इस प्रकार वर्ष 1947 आजादी के लिए तय हो गया।

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आखिर 15 अगस्त ही क्यों आजादी का दिन बना –  

  • दोस्तो लार्ड माउंट बेटन 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते थे क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 15 अगस्त 1943 को जापानी आर्मी ने आत्म समर्पण किया था और उस समय लार्ड माउंट बेटन हलाइड फोर्सेज के कमांडर थे तो इस कारण से लार्ड माउंट बेटन ने 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते हुए इसे चुना। 

रात्रि 12 बजे ही क्यों हमे आजादी मिली – 

  • जब लार्ड माउंट बेटन ने आजादी मिलने की तारीख 3 जून 1948 से 15 अगस्त 1947 कर दी तो देश में ज्योतिषों में खलबली मच गई क्योंकि ज्योतिष के अनुसार यह तारीख अमंगल और अपवित्र थी। लार्ड माउंट बेटन को दूसरी कई तारीख सुझाई गई जो शुभ थी लेकिन वो 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते हुए उस पर अडिग थे।
  • फिर इसके बाद ज्योतिषों ने एक उपाय निकाला उन्होंने 14 और 15 अगस्त की रात्रि 12 बजे का समय तय किया क्योंकि अंग्रेजो के हिसाब से अगला दिन 12AM पर यानी रात्रि 12 बजे शुरू होता है लेकिन हिन्दू केलेंडर के हिसाब से सूर्य उदय होने पर ही अगला दिन माना जाता है।
  • सिर्फ यही नहीं उन्होंने नेहरू जी से यह भी कहा की उन्हें अपनी आजादी की स्पीच अभिजीत मुहूर्त में 11:51 मिनट की रात्रि में और 12:39 मिनट रात्रि में ही समाप्त कर देनी होगी। इसमें एक शर्त ये भी थी कि नेहरू जी को अपनी स्पीच ठीक रात को 12 बजे खत्म कर देनी होगी।
  • जिसके बाद शंख नाथ किया जाएगा जो एक नए देश के जन्म की गूंज पूरी दुनिया तक पहुंचाएगा तो दोस्तो आज हमारे देश को आजाद हुए 74 साल हो गए है लेकिन हमारे लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि हमे 15 अगस्त 1947 को ही क्यों आजादी मिली। आशा है कि भारत का स्वतंत्रता दिवस आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां लेकर आए। आपको स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2020 की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं।

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आजादी की कहानी –

  • 17वी शताब्दी के शुरुवात से अंग्रेज़ भारत आने लगें थे। तब भारत में मुगल का राज्य चलता था। जो 18वी शताब्दी से कमजोर होने लगा था वैसे तो वो यहां वाणिज्य करने आए थे। पर उनके इरादे कुछ और ही थे। वाणिज्य के नाम पर यहां की कुल संपत्ति को हड़पना ही उनका लक्ष्य था। सम्राटों के वित्तरहित समस्या के मौके को देखते हुए वो भारत पर अपना अधिकार बना बैठे।
  • प्लासी और बक्सर की जंग पर जीत हासिल करने के बाद भारत पर उनका शासन प्रतिष्ठित हो गया। फिर भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना हुई। यहां के लोगों का सर्वनाश करके वो आगे को बढ़ते जा रहे थे। और तो और भारत में अत्याचार और अनाचार बढ़ता ही जा रहा था।
  • यदि किसी जमीन का सही उत्तराधिकारी नहीं होता था तो वह जमीन ईस्ट इंडिया कंपनी को हो जाती थी। अगर कभी छोटा मोटा विरोध होता था, तो वह तीन चार लोगो तक सीमित रह जाता था।
  • सिपाहियों के लिए वो एक नया कारतूस लाए थे जो गाय और सुअर की चर्बी से बनता था और उसको दांत से काटकर बंदूक में भरा जाता था। इस तरीके से उनके धर्म की आघात पहुंचाकर ईसाई धर्म को फैलाना ही इनका लक्ष्य बन गया था।
  • इस तरह सिपाहियों के मूल विश्वास कि अपेक्षा को वो सह नहीं पा रहे थे और उनके अंदर इसके विरुद्ध विरोध करने की हिम्मत नहीं थी। तब मंगल नाम के एक सिपाही ने उस तत्व को सामने लाया। और उनके इस प्रतिरोध के आग को नेतृत्व किया।
  • तब शुरू हुआ सन् 1857 में सिपाहियों का विरोध। जो पूरे देश में फ़ैल गया। पर वो नाकामयाब रहें। और मंगल पांडेय को इस विरोध के लिए फांसी की सजा दी गई। 

भारतीय जनता पार्टी का जन्म (बंग – भंग आंदोलन) –

  • सन् 1885 में जन्म हुआ भारतीय जानता पार्टी का जन्म हुआ। जो भारत कि आजादी की एक नई किरण लाए। इन दिनों बंगाल में राष्ट्रभाव कि भावना तेज़ी से बढ़ती जा रही थी। और वन्दे मातरम् कि धुन में शिक्षित बंगालियों ने अंग्रेज़ो के खिलाफ आवाज उठायी।
  • बंगाल ने ब्रिटिश के बढ़ते हुए विरोध को देखते हुए लार्ड कर्ज़न ने बंगालियों वो विभाजित करने का निर्णय लिया। इन्होंने बड़े ही चालाकी से बंगालिवासी संप्रदाय को अलग कर दिया। और फिर शुरू हुआ बंग – भंग आंदोलन।
  • बाद में बंगाल से खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चाकी, बिनोय, बादल और दिनेश जैसे युवा अंग्रेज़ो के खिलाफ हथियार उठाकर देश के लिए हंसते हुए अपने प्राणों को त्याग दिया। और अब वह बंगाल का अग्नि युग कहलाने लगा।
  • उसके फलस्वरूप अंग्रेज़ो ने सन् 1911 में भारत की राजधानी कलकत्ता को हटाकर दिल्ली कर दिया। पर संग्राम नहीं रुका।

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रॉलेट सत्याग्रह आंदोलन –

  • सन् 1914 से प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ। जहां पर अंग्रेज़ो ने भारत के सिपाहियों पर वार किया। सन् 1915 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से वापस आएं। और उन्होंने भारत को आजाद कराने का लक्ष्य बना लिया था।
  • सन् 1919 में बढ़ते हुए विरोध को पर काबू करने के लिए ब्रिटिश के जज़ सिडनी रॉलेट ने एक कानून दिया जिस कानून के कारण पुलिस बिना कुछ कहे ही लोगो को गिरफ्तार का सकती थी। और बच्चो से पढ़ने लिखने का भी अधिकार भी छीन लिया गया था। इसके फलस्वरूप भारत में शुरू हुआ एक नया आंदोलन रॉलेट सत्याग्रह। 

असहयोग आंदोलन –

  • रेजीनल्ड डायर ने पंजाब के हर एक बैठक में प्रतिबंध लगा दिया। यहां तक कि चार लोगो का एक साथ खड़े ल अपराध था। हालांकि यह सूचना व्यापारिक रूप से प्रचारित नहीं हुआ था।
  • 13 अप्रैल को अमृतसर के जालीवाला बाग पर लोग बैसाखी का त्योहार मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। और कर्नल डायर ने उस भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया और वहां के सारे द्वार बंद कर दिए गए ताकि कोई वहां से भाग ना पाए और मात्र 10 मिनट तक हत्याकांड चला।
  • जिसमे लगभग 1500 मासूम जनता घायल हुई और 1000 लोग मारे गए। उनकी इस क्रूरता ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने प्रतिवाद में अपना ब्रिटिश छोड़ने का फैसला लिया। इस हत्याकांड ने भारतीयों को आजादी से लड़ने को प्रेरित किया। भारतीय जनता कांग्रेस ने फिर असहयोग आंदोलन का फैसला लिया। 

पूर्ण स्वराज का फैसला –

  • सन् 1922 में उत्तेजित जनता चौरी चौरा नामक पुलिस स्टेशन पर आग लगा दिया जिसके दौरान 23 भारतीय थानेदार और चपरासी मारे गए। इसके लिए अहिंसा के पुजारी गांधीजी असहयोग आंदोलन को स्थगित करने पर मजबूर हो गए। पर तब तक भारत पर प्रतिवाद कि बारी आ गई थी।
  • सन् 1925 में हिंदुस्तान ने सार्वजनिक संघ (Public Association) के प्रतिनिधियों ने काकोरी नामक स्थान पर ट्रेन को रोककर अंग्रेज़ो से पैसा लूटने का साजिश की। इस ट्रेन को हम काकोरी ट्रेन Conspiracy के नाम से जानते है। संगठन के ,हथियार के लिए पैसों की जरूरत होती थी पर उन्होंने एक भी भारतीय को नहीं लूटा।
  • सन् 1927 में भारत की संवैधानिक सुविधाओं के लिए ब्रिटिश सरकार के लिए John Simon के नेतृत्व में एक दल भेजा। जिसमे कोई भी भारतीय नहीं था उनका स्वागत प्रतिरोध और काले झंडे से किया गया था।
  • लाहौर में एक ऐसे गो बैक साइमन (Go Back Simon) के आंदोलन पर नतृत्व दे रहे थे। जहाँ लाला लाजपत राय बहुत यूवाओ कि प्रेरणा थे। पुलिस की लाठीचार्ज पर इनका देहांत हो गया था।
  • उनकी मृत्यु का बदला लेने के लिए युवा भगत सिंह और राजगुरु निकल पड़े थे। उस समय भगत सिंह अंग्रेज़ो कि परेशानी बन गए थे। बटुकेश्वर दत्त के साथ उन्होंने केंद्रीय विधान सभा पर बम गिराया। उनके आत्मसमर्पण के बाद उन्हें फांसी पर चढ़ाया गया। सन् 1929 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का फैसला किया।

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नमक आंदोलन और दांडी मार्च –

  • 31 दिसम्बर में नेहरू जी ने लाहौर में तिरंगा फैलाया। 26 जनवरी सन् 1930 में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। पर ब्रिटिश सरकार नहीं माने। उसके बाद कांग्रेस कार्य समिति सदस्य साबरमती पर एकत्रित हुए और नमक आंदोलन किया। जिसकी शुरुवात दांडी मार्च से शुरू किया गया।

असहयोग आंदोलन का आज असमाप्त काम को नमक आंदोलन कर रहा था। जिसमे पूरा देश शामिल हो गया था एक हड़ताल पूरे देश को रोक देने वाला था जिससे सारे स्कूल, कॉलेज और ऑफिस सारे बहिष्कार करने लगे थे विदेशी चीजे सड़क पर जलाने लगी थी टैक्स बढ़ाना भी बंद कर दिया गया था उसके बाद दूसरे गोल मेज बैठक पर गांधीजी को बुलाया गया और लंदन से आने के बाद भी उन्होंने नमक आंदोलन को जारी रखा। 

आमरण अनशन –

  • ब्रिटिश सरकार कांग्रेस को अवैध घोषित किया। 4 जनवरी सन् 1932 में गांधीजी को बिना मुकदमा किए गिरफ्तार कर लिया गया और वहां पर गांधीजी ने सामाप्रदायिक निर्णय के विरोध में आमरण अनशन का फैसला किया। जो उन्होंने पुनः संधि के बाद भंग कर दिया।

सत्याग्रह आंदोलन –

  • मई सन् 1933 में गांधीजी जेल से बाहर आए और फिर शुरू हुआ सत्याग्रह आंदोलन। सन् 1935 में पास हुआ The Government Act of India. इसके बाद भारत में चुनाव शुरू हो गए। इसके बाद भारत में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का आगमन हुआ। वो समझ गए थे कि आजादी के लिए भारतीयों को जंग लड़ना पड़ेगा और अपना खून बहाना पड़ेगा।
  • सन् 1938 में हरिपुरा (Haripura) कांग्रेस के सभापति बने जो गांधीजी के इच्छा के विरूद्ध था। सन् 1939 में भी कांग्रेस के सभापति निर्वाचित होने के बावजूद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। और प्रसिद्ध Forward Block प्रतिष्ठित थे।

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द्वितीय विश्व युद्ध –

  • द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने पर अंग्रेज़ो के युद्ध नीति के विरोध पर सारे कांग्रेस नेता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था उस समय सुभाष चन्द्र बोस को उनके पैतृक घर पर गिरफ्तार कर लिया गया था पर वो बड़े ही चालाकी से बच निकले और जापान पहुंच गए। नाम बदलकर अलग दिखकर वो कैसे भी बर्लिन पहुंचे। और उन्होंने वहां के हिटलर से सहायता मांगी पर उन्होंने मदद करने से इंकार कर दिया। और फिर से वो जापान वापस लौट आए।
  • वहां के राजबिहारी बसु के साथ मिलकर जंग में पकड़े गए ब्रिटिश भारतीय सेनाओं को लेकर बनाया एक आजाद हिन्द फौज। और बाद ने यह आजाद हिन्द फौज ब्रिटिश के डर का कारण बन गया था। सामने से नेतृत्व देने वाले नेताजी दिल्ली चलो का ऐलान किया पर विश्व युद्ध में जापान के परास्त होने के दौरान आजाद हिन्द कमजोर पड़ गया था। इनकी रोमांचक कहानी ने सारे भारत देश को प्रेरित किया। 

भारत छोड़ो आंदोलन –

  • सन् 1942 में गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। 9 अगस्त सन् 1942 में उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया लेकिन इस बार भारत नहीं रुका। आजादी का ख्वाब सबको लड़ने के लिए शाहस दिया अब उन्हें कोई भी नहीं रोक सकता था दंगे, आंदोलन और भाषण अब नियमित रूप से बन चुका था अब भारतीयों के अंदर गिरफ्तार होने और मरने का खौफ खत्म हो चुका था स्वाधीनता अब केवल समय का पात्र ही रह गया था।

देश की आजादी – पाकिस्तान और भारत का अलगाव

  • Md. Ali Jinnah ने सन् 1946 में एक नया देश कि भावना का प्रस्ताव रखा। वो एक मुस्लिम देश चाहते थे जहां सिर्फ मुस्लिम का शासन हो न की एक हिन्दू का। पर ये प्रस्ताव ज्यादातर कांग्रेस के नेताओ ने नकार दिया। पर Jinaah नहीं माने और शुरू हो गया दो समुदाय में दरार। और एक दूसरे को भाई मानने वाले लोग अब आपस में लड़ने लगे थे और एक दूसरे को लूटने लगे थे अब दोनों समुदाय एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बन गए थे और पूरे भारत में दंगे होने लगे थे।
  • स्वतंत्रता तो तय थी पर अब एक नयी मुसीबत आ गई थी हिन्दू और मुस्लिम के बीच दरार। 14 अगस्त सन् 1947 को सबके सहमति से मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान का जन्म हुआ था।
  • 15 अगस्त सन् 1947 में मध्य रात्रि को हमारा भारत स्वतन्त्रता हासिल किया था। पूरे देश में खुशी का माहौल छा तो गयी थी पर विभाजन के दौरान बहुत मासूमों का घर उजड़ गया उनके परिजन मारे गए।
  • आजादी के 74 साल बाद भी ताजे है लोगो के घाव। अंग्रेज़ चले तो गए पर हमे आपस में लड़ा गए। ऐसी आजादी कि मांग शायद खुदीराम, भगत सिंह और राजगुरु ने भी नहीं किया था। 
  • इंसान के बारे में विचार इंसानियत से करें किसी धर्म या रंग से नहीं हर एक आदमी जो देश के लिए और सबके स्वतंत्रता के लिए अपने खून बहाया और प्राण त्यागे वो किसी धर्म या किसी रंग के नहीं बल्कि अपने देश वासियों के लिए लड़े थे। यह सब सोचकर उनके बलिदान की छोटा न करें। 

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Anamika Garg

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