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‘विश्व योग दिवस’ क्यों मनाया जाता है और योग के फायदे क्या – क्या है? – International Yoga Day 2020

तो आइये दोस्तों, बात करते है Yoga Day के बारे में। योग शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ- साथ  जापान, चीन, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका के अलावा पूरी दुनिया में फैल गया है। दुनियाभर में Yoga की प्रसिद्धि को देखते हुए  11 दिसंबर सन् 2014 को ‘United Nations General Assembly’ में हर साल 21 जून को ‘International Yoga Day’ मनाने का फैसला लिया गया।

इस बारे में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने कहा था, “योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है, योग दिमाग और शरीर कि, एकता का प्रतीक है; और तो और प्रकृति और मनुष्य के बीच वह सामंजस्य है; जो विचार और संयम पूर्ति करने में सहयोग करता है और तो और स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक अच्छा दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।

यह तथ्य व्यायाम के बारे में नहीं है बल्कि हमारी अंदर की  एकता, भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवनशैली में योग चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आइए ‘International Yoga Day’ को गोद लेना के दिशा में  काम करते हैं। 

योग और योगासन

Yoga एक दर्शन है जिससे जीवन को समग्र रूप से देखने की दृष्टि प्राप्त होती है। यह मानव समाज को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में पूर्णतः सक्षम है। योगासन को एक वैज्ञानिक पद्धति माना गया है। इससे शरीर एवं मन स्वस्थ रहता है, रक्त नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं, फेफड़े खुल जाए हैं, मांसपेशियों में स्वाभाविक लचक आ जाती है, उनकी ऑक्सीजन लेने की क्षमता चरम सीमा तक बढ़ जाती है तथा शरीर में उत्पन्न होने वाले विकार कम होते हैं।

योगासन के द्वारा हम न केवल अपने शरीर की सफाई करते हैं बल्कि उसे अनुशासित करने का भी सफल प्रयास करते हैं।रोज़मर्रा की जिंदगी के तनाव और बातचीत के परिणाम स्वरूप बहुत से लोग अनेक मानसिक परेशानियों से भी पीड़ित हैं इन सभी रोगों का इलाज आपको तुरंत ही योग करने से नहीं मिलता है। आजकल तो योग दुनियाभर में जागरूकता फैला रहा है।

योग के लाभ 

अंग्रेजी में एक कहावत है, ‘Health Is Wealth’ मतलब ‘स्वास्थ्य ही धन’ है। अगर Health अच्छा होगा तो धन कभी भी कमाया का सकता है। लेकिन आजकल तो लोग अपने स्वास्थ्य को दरकिनार कर सिर्फ पैसा कमाने की होड़ में लगे रहते है। स्वास्थ्य और मन दोनों अच्छा हो तो ज़िंदगी आसान हो जाती है। जिंदगी को अच्छे और बेहतर ढंग से जीने के लिए जरूरी है कि हम शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहें। इसके लिए सबसे जरूरी है योगा। वो कहते हैं ना कि  ‘Yoga से ही होगा’ ये बात शत प्रतिशत सही है।

Yoga करने के लाभ अनेक हैं। योगा करने में हर बीमारी से बचने का इलाज छुपा है, फिर चाहे वह Mentally हो या Physically। इतना ही नहीं, बेहतर Health के लिए Yoga से अच्छा और कोई Option नहीं है।इस ‘International Yoga Day’ में जानिए, Yoga के फायदे, Yoga का महत्व, Yoga के Mental Benefits, योगासन के स्वास्थ्य लाभ और भी बहुत सी बाते। जो जानना आपका बेहद जरूरी है।

Yoga अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गाठिया, पाचन विकार  और अन्य बीमारियों में भी चिकित्सा का एक सफल विकल्प है, ख़ास तौर पर वहां जहां आधुनिक विज्ञान आजतक उपचार देने में सफल नहीं हुआ है। चिकित्सा के बारे में  वैज्ञानिकों का कहना है, कि योगा चिकित्सा का कार्य तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्र को संतुलन बनाए रखना है जिसका कार्य शरीर के  सभी प्रणालियों और अंगो को सीधे प्रभावित करना है।

योग बुरी आदतों के प्रभाव को बदल देता है, जैसे- सारे दिन कुर्सी में बैठे रहना, मोबाइल फोन ज्यादा इस्तेमाल करना, व्यायाम ना करना, गलत खान पान इत्यादि। योगा और योगासन के कई अध्यात्मिक लाभ है। योग और योगासन का वितरण करना आसान नहीं होता है, क्योंकि आपको ही Yoga का अभ्यास करके उन्हें हासिल और महसूस करना पड़ेगा। हर एक व्यक्ति को योगा अलग-अलग रूप से लाभ पहुंचाता है। इसलिए योग को जरूर से जरूर अपनाएं और अपनी मानसिक, भौतिक, आत्मिक और अध्यात्मिक सेहत में सुधार लाएं।

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योग सम्बन्धी प्रमुख बातें या नियम

योग भारत की एक प्राचीनतम पद्धति है। मन को वश में करने के लिए Yoga से बढ़कर कोई अन्य उपाय नहीं है। लेकिन योग करते समय बहुत ही सावधानी रखने की आवश्यकता है। योग करते समय निम्न नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. योग एकाग्रचित्त होकर करना चाहिए। योग करते समय बातचीत बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। योग प्रारंभ करते समय अपने शरीर की स्वास गति को सामान्य और शांत रखना चाहिए।
  2. योग का अभ्यास धीरे-धीरे और सफतापूर्वक करना चाहिए। दो आसनों के मध्य थोड़ा विश्राम करना चाहिए।
  3. आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और आसन की पूर्ण स्थिति तक जाने के लिए प्रतिदिन प्रयास करना चाहिए।
  4. आसन करते समय शरीर पर कम से कम वस्त्र रखने चाहिए, लंगोट, चुस्त नेकर व चुस्त बनियान पहनकर आसन करना अति उत्तम है।
  5. योग एक वैज्ञानिक विधि है। अतः योगासनों का अभ्यास करते समय पहले अपने प्रशिक्षक के निर्देशानुसार ही कार्य करना चाहिए।
  6. योग खाली पेट करना चाहिए और योग के बाद भी कम से कम दो घंटे तक कुछ नहीं खाना चाहिए।
  7. योग करने व्यक्ति को संतुलित और हल्का भोजन ग्रहण करना चाहिए। आसन के दो घंटे बाद फल या दूध ग्रहण करना उत्तम है।
  8. योग का अभ्यास प्रातःकालीन शौच आदि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर करना चाहिए। स्नान के बाद योग करना अति उत्तम है। सायंकाल खाली पेट होने पर भी योगासनों का अभ्यास किया जा सकता है।
  9. आसन करने का स्थान शांत, स्वच्छ और हवादार होना चाहिए।
  10. आसन करने की भूमि समतल होनी चाहिए। दरी या कम्बल बिछाकर ही आसन करना चाहिए।
  11. योग करते समय आंखे खुली रहनी चाहिए और नाक से सांस लेना चाहिए।
  12. एक आसन दो से पांच मिनट करना चाहिए।
  13. थकान और बीमारी की अवस्था में आसनों का अभ्यास कदापि नहीं करना चाहिए।
  14. वज्रासन, शलभासन जैसे आसन बालकों को नहीं करना चाहिए।
  15. धनुरासन, भुजंगासन, मत्स्येंद्रासन आदि आसन बालिकाओं को नहीं करने चाहिए।
  16. आसनों का प्रारंभ सूर्य नमस्कार की स्थितियों से करना चाहिए।
  17. सर्वांगासन की पहली और अंतिम स्थिति में पहुंचने तक कम से कम दस मिनट समय लगाना चाहिए।
  18. आसन और प्राणायाम का अभ्यास करते समय निकलने वाला पसीना कपड़े से कभी नहीं पोंछना चाहिए।
  19. योग करते समय आत्म-विश्वास, शारीरिक निरोगता आदि की भावनाएं मन में रखनी चाहिए।
  20. आसनों के अभ्यास के बाद शवासन अवश्य करना चाहिए। शवासन की स्थिति में शरीर को काफी आराम मिलता है और शरीर में अद्भुत शक्ति का संचार होता है।

योग के प्रकार

वैसे तो कहना मुश्किल है कि योग के कितने प्रकार हैं। लेकिन हम आपको आजकल चर्चा में आने वाले प्रकारों के बारे में बता रहे हैं।

राज योग –

राज का अर्थ होता है शाही और योग की इस शाखा का सबसे महत्वपूर्ण अंग है ध्यान। इस योग के आठ अंग है। जो इस प्रकार है – यम(शपथ लेना), नियम (आत्म अनुशासन), आसन (मुद्रा), प्राणायाम(श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार( इन्द्रियों का नियंत्रण), धारणा(एकाग्रता), ध्यान (मेडिटेशन), समाधि(बंधनों से मुक्ति या परमात्मा से मिलन) इस आठ अंग को पतंजलि ने अष्टांग नाम दिया।

राज योग उन व्यक्तियों को आकर्षित करता है। जो आत्मविवेक और ध्यान से कार्य करता है। सबसे प्रसिद्ध आसन राज योग है। आपको यह पता है कि, बहुत से लोगों के लिए योग का अर्थ ही है आसन। किन्तु आसन योग का सिर्फ़ एक प्रकार का हिस्सा है। राज योग को सभी योगों का राजा माना गया है, क्योंकि राज योग अन्तर्गत, सभी योगों कि कोई न कोई  एक खासियत तो जरूर होगी। आप अपना थोड़ा सा समय निकाल कर   है। इसका आत्म -निरीक्षण कर सकते है। यह ऐसी साधना है, जिसे हर व्यक्ति कर सकता है।

ज्ञान योग

ज्ञान योग को बुद्धि का मार्ग भी माना गया है। ज्ञान योग, ज्ञान और स्वयं से परिचय करने का जरिया है। इसके जरिए मन के अन्धकार यानि अज्ञानता को दूर किया जाता है। कहां जाता है कि आत्मा की शुद्धि ज्ञान योग से ही होती है। चिंतन करते समय शुद्ध स्वरूप को प्राप्त कर लेना ही ज्ञान योग कहलाता है। और आप योग के ग्रंथों का अध्ययन करके,  बुद्धि का विकास कर सकते है। क्या आप जानते है? ज्ञान योग को अत्यधिक कठिन माना गया है। और इसको यह भी कहा जा सकता है कि स्वयं में लुप्त आपार संभावनाओं की खोज कर ब्रम्हा में लीन हो जाना ही ज्ञान योग कहलाता है।

कर्म योग

कर्म योग सेवा का मार्ग है कर्म योग को हम एक श्लोक के माध्यम से समझते हैं। योगा कर्मो किशलयाम यानि कर्म में लीन होना। और तो और श्रीकृष्ण ने भी गीता में  कहा है ‘योगा कर्मसु कौशलम’ इसका अर्थ है कि कुशलतापूर्वक कार्य करना ही योग है। कर्म योग का सिद्धांत है कि जो हम अनुभव करते है वह हमारे कार्यों द्वारा अतीत में बनाया गया है। जब हम अपना कार्य करते  है और अपने जीवन को बिना किसी स्वार्थ भाव से जीते हैं और सभी की सेवा नि:स्वार्थ भाव से करते हैं, तब हम कौन सा योग करते है, कर्म योग। कर्म योग करने से क्या होता है? इससे हम किसी भी मोह माया में फंसे बिना ही अपना सांसारिक कार्य कर सकते है। और अंत में परमेश्वर में लीन हो जाते हैं। गृहस्थ लोगों के लिए कर्म योग सबसे उपयुक्त माना गया है।

भक्ति योग 

भक्ति अर्थात नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करना और योग अर्थात जुड़ना।  ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण भाव , सच्ची निष्ठा, भक्ति योग माना जाता है। भक्ति योग कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह धनी या निर्धन ही व्यक्ति क्यों ना हो। हर व्यक्ति का कोई न कोई ईष्ट होता है, जिनकी वो पूजा करते है।  बस उसी पूजा को भक्ति योग कहा जाता है। यह भक्ति निस्वार्थ भाव से की जाती है, ताकि हम अपने उद्देश्य को हासिल कर सकें।

हठ योग

हठ योग भारतीय साधना पद्धति है। हठ में ह का अर्थ है हकार मतलब दाई नासिका स्वर, जिसको पिंगला नाड़ी भी कहते हैं। वहीं ठ का अर्थ ठकार मतलब बाई नासिका स्वर, जिसे इड़ा नाड़ी कहते हैं, जबकि योग दोनों को ही जोड़ने का काम करता है। हठ योग के जरिए दोनों नाड़ियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। माना जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि मुनि हठ योग किया करते थे। हठ योग करने से आप शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं और मानसिक रूप से भी शांति मिलती है। 

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योग करने का सही समय

सुबह सूर्योदय से पहले एक या दो घंटे योग करना काफी अच्छा समय होता है। माना जाता है कि अगर हम ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर योग करते हैं, तो सबसे ज्यादा फायदा होता है। क्योंकि उस समय वातावरण शुद्ध रहता है और ताजी हवा भी चल रही होती है। अमूमन आध्यात्म ज्ञान प्राप्त करने वाले व्यक्ति ही इस समय योगाभ्यास करते हैं। ब्रम्ह मुहूर्त का समय सुबह चार बजे माना गया है। इस समय सभी का उठना तो संभव नहीं है, इसलिए अगर आप सूर्योदय के समय भी योग  करते हैं, तो बेहतर है। जिससे शरीर दिनभर ऊर्जावान रहता है। इसके अलावा इन बातों पर भी ख़ास ध्यान दें।

  1. अगर आप दिन का कोई समय योग के लिए निर्धारित कर ले, तो यह उत्तम होगा।
  2. सभी आसन योगा मैट या दरी बिछाकर ही करें।
  3. आप योग किसी खुली जगह पर ही करें। जिससे आप खुल कर सांस ले सकें।

योग की शुरुआत करने की लिए सुझाव

आप अगर योगाभ्यास (Yoga Practice) जीवन में पहली बार शुरू कर रहे है या योग से ज्यादा परिचित नहीं है, तो इन सभी बातों का ख़ास ध्यान रखें।

  • आप अपने योगाभ्यास को धैर्य और दृढ़ता के साथ करें। यदि आपके शरीर में लचीलापन  कम है, तो सुरुआत में आपको आधिकतर आसन करने में कठिनाई हो सकती है। अगर आप सुरूआत में आसन ठीक से नहीं कर पा रहे हों तो चिंता ना करें। सभी आसन दोहराव के साथ आसान हो जाएंगे। जिन जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव कम है, वह सभी धीरे धीरे लचीले हो जाएंगे।
  • अपने शरीर के साथ ज़बरदस्ती या जल्दबाज़ी बिल्कुल ना करें।
  • आप सूरुआत में वही आसन कर पाएंगे को आपके लिए आसान होगी। आपको बस इतना ध्यान रखना है, कि आपकी श्वास लयबद्ध हो।
  • शुरूआत में हमेशा दो आसनों के बीच कुछ सेकेंडों के लिए आराम करें। दो आसनों के बीच में विश्राम की अवधि अपने शारीरिक जरूरतों के हिसाब से तय कर लें। समय के साथ अवधि कम कर लें।

योगाभ्यास के समय सही मानसिक स्थिति क्या है ?

  • आप अगर कोई भी आसन कर रहे हैं, तो उस पर गहरा ध्यान लगाएं। शरीर के जिस भी अंग पर उस आसन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, उस पर अपनी एकाग्रता केंद्रित करें। ऐसा करने से आपको आसन का अधिकतम लाभ मिलेगा। 
  • आसन के समय जो श्वास लेने का तरीका है वैसे ही करें (कब श्वास अंदर लेना है और कब बाहर छोड़ना है) अगर आपको इसका ज्ञात ना हो तो जो सामान्य लयबद्ध श्वास रखें।
  • हमे योगासन करने से पहले अपने मन को शांतिपूर्ण अवस्था में रखना चाहिए। जिससे हम अपने मन को स्थिरता और शांति के विचारों से भर सकें, और अपने विचारों को इन बाहरी दुनिया से दूर कर सकें और स्वयं को केंद्रित कर सकें।
  • आप सुनिश्चित कर लें कि आप इतने थके ना हों कि आसन में ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ हों अगर थकान ज्यादा हो गई हो तो सिर्फ रिलैक्स करने वाले ही आसन करें।

योग के मानसिक लाभ 

नियमित रूप से Yoga करने पर तनाव और अवसाद जैसी परेशानियां दूर रहती है। जानिए Yoga के Mental Benefits

  1. योग से याददाश्त और एकाग्रता में सुधार होता है।
  2. योग चिंता और अवसाद को कम करने में मददगार है।
  3. योग भावनात्मक नियंत्रण और मानसिक आराम बनाए रखता है।
  4. योग आत्म नियंत्रण बनाए रखने में सहायक होता है।
  5. योग गुस्सा शांत रखने में मददगार होता है।
  6. योग रिश्तों में मधुरता और मानसिक रूप कायम रखने में सहायक होता है।
  7. योग आपके गुणों को आपसे अवगत कराता है।
  8. योग ज़िंदगी सम्बन्धित सही व बेहतर निर्णय लेने में मददगार होता है।

योग तथा प्राणायाम की आवश्यकता और महत्व

आंतरिक अंगों की स्वस्थता

  • मानव शरीर में बहुत से स्नायु हैं। हड्डियां, मस्तिष्क, फेफड़े, यकृत आदि आंतरिक इन्द्रियों की रक्षा के लिए इन अंगों के चारों ओर छोटा बड़ा स्नायु वेस्टन होता है। यदि स्नायु को उचित व्यायाम मिलेगा तो अंदर के सभी अंग स्वस्थ रहेंगे। इन अंगों को स्वस्थ रखने का कार्य योगासनों का है।

मानसिक संतुलन

  • मन को संतुलित रखने में योगासन महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। जब आसन किया जाता है तो आगे पीछे झुकने से स्नायु सिकुड़ता है तथा फैलता है। इससे सभी ग्रंथियां क्रियाशील हो जाती हैं। इस प्रकार मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।

रक्त का शुद्ध करना 

  • योगासनों द्वारा श्वास प्रश्वासो की संख्या तथा वेग बढ़ जाता है। गहरे तथा लंबे श्वास लेता है। इससे फेफड़े तथा सभी अंग कार्य करने लगते हैं। गहरे श्वास लेने से वायु का बहुत संचार होता है। फेफड़े सारे शरीर में शुद्ध वायु पहुंचा देते हैं तथा रक्त को शुद्ध करते हैं।

शरीर में लचीलापन 

  • योगासन से धमनियां, सिर, मेरुदंड व मांसपेशियां लचीली बन जाती है। वृद्धावस्था में भी लचीली बनी रहती हैं। इसी कारण वृद्धावस्था में भी आसन किये जा सकते हैं।
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मुफ्त का लाभ 

  • योगासनों के लिए ना तो किसी विशेष स्थान की आवश्यकता है न ही किसी उपकरण की। इसमें अपना खर्च तो होता नहीं। जो भी है लाभ ही लाभ है।

शरीर पर नियंत्रण

  • आसन करने से शरीर हल्का रहता है, फुर्ती तथा स्फूर्ति आती है। मोटापा रोगों की जड़ है।

सम्पूर्ण विकास 

  • शरीर के सभी तंत्र योग तथा प्राणायाम से विशेष रूप से प्रभावित होते हैं तथा शरीर का विकास होता है।

चिकित्सा

  • योग तथा प्राणायाम कब्ज की सबसे बढ़िया दवा है। इसके द्वारा तिल्ली, जिगर तथा आंतों को भी ठीक किया जा सकता है।

शक्ति का संचय

  • आसनों से प्राणों में शक्ति आती है। आलस्य दूर भागता है।

हमारी सलाह

मेरा तो यही कहना है कि योग करते रहिए। और अपने शरीर को स्वस्थ रखिए। और आगे बढ़ते रहिए। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो इसे लोगों को शेयर करें। क्योंकि ज्ञान बांटने से बढ़ता है और हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब भी कर ले जिससे आपको हमारे नए पोस्ट की Notification सबसे पहले मिले और कोई भी पोस्ट Miss ना हो। अगर आपके मन में कोई प्रश्न उठ रहा हो तो हमे कमेंट बॉक्स में बताये। हम आपके प्रश्नो का उत्तर अवश्य देंगे। धन्यवाद !!

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Alka Garg

Alka Garg

I am 16 years old content writer. I am learning here to write articles in the fields of Technology, Innovation, Facts, Biography, Life Hacks and Viral Talks. I love to cook and explore at least one thing in a day.

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